माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ अमेरिका की एक अदालत में पेश हुए। इस दौरान उन्होंने गूगल के खिलाफ गवाही दी। उन्होंने कहा कि गूगल के एक छत्र प्रभुत्व के कारण प्रतिद्वंद्वी बाजार में उभर नहीं पर रहे हैं। गूगल ने अपने साम्राज्य को बनाए रखने के लिए एपल जैसी कई टेक कंपनियों को अवैध रूप से अरबों रूपये दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन की एक अदालत में माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नाडेला उपस्थित हुए। इस दौरान अदालत में उन्होंने कहा कि उनका सर्च इंजन बिंग साल 2009 से बाजार में है। वह बाजार में गूगल की तरह अपनी हिस्सेदारी बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन वह अथक प्रयासों के बाद भी इतने वर्षों में सफलता हासिल नहीं कर पाया है। इसकी मुख्य वजह है एपल के साथ गूगल के संबंध। नाडेला ने कहा कि जब आपके पास बाजार में हिस्सेदारी नहीं है तो आपके लिए बाजार में लंबे समय तक टिक पाना अधिक मुश्किल हो जाता है।
गूगल के कारण बाजार में बिंग की हालत खस्ता
नडेला ने आगे कहा कि गूगल एपल को अरबों रुपयों का भुगतान करता है, जिस वजह से एपलने माइक्रोसॉफ्ट के विचारों को अस्वीकार कर दिया। गूगल के कारण बिंग बहुत कमजोर पड़ गया है। गूगल के प्रभुत्व के बाद भी बिंग लगातार निवेश कर रहा है फिर भी बाजार में हिस्सेदारी नहीं बढ़ पा रही है।
विज्ञापन से गूगल करती है मोटी कमाई
अमेरिकी सरकार का कहना है कि एक लाख ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक की अल्फाबेट की कंपनी एपल जैसी स्मार्टफोन निर्माताओं और वायरलेस सेवा प्रदाता एटीएंडटी और अन्य कंपनियों को अपने उपकरणों में गूगल को डिफाल्ट सर्च इंजन बनाने के लिए हर साल अवैध रूप से 10 अरब डॉलर का भूगतान करती है। सर्च बाजार में 90 फीसदी की हिस्सेदारी वाली गूगल को अपने दबदबे के चलते विज्ञापनों से मोटी कमाई होती है।