रुबिन ने ये बातें अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी जर्नल में प्रकाशित संपादकीय लेख ‘खालिस्तानी आतंकवाद : अमेरिका और कनाडा में बढ़ता खतरा’ में कही। उन्होंने कहा, खालिस्तानी आतंक कनाडा में सुर्खियां बटोर रहा है जबकि पीएम जस्टिस ट्रूडो भारत पर अपने देश की धरती पर वांछित आतंकी हत्या का आरोप लगाने में जुटे हैं।
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो और मिडिल ईस्ट फोरम में नीति विश्लेषण के निदेशक माइकल रुबिन ने कहा कि खालिस्तानी मूवमेंट अमेरिका और कनाडा के लिए अस्तित्ववादी खतरा पेश कर रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि खालिस्तानियों की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो को बताना होगा कि वह आतंकवाद को समर्थन नहीं करते हैं।
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रुबिन ने ये बातें अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी जर्नल में प्रकाशित संपादकीय लेख ‘खालिस्तानी आतंकवाद : अमेरिका और कनाडा में बढ़ता खतरा’ में कही। उन्होंने कहा, खालिस्तानी आतंक कनाडा में सुर्खियां बटोर रहा है जबकि पीएम जस्टिस ट्रूडो भारत पर अपने देश की धरती पर वांछित आतंकी हत्या का आरोप लगाने में जुटे हैं।
हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ पर खामोशी
रुबिन ने कहा, अमेरिकी लोग ईरानी छात्रों की ओर से तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा करने पर गुस्सा दिखाते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं, खालिस्तानी आतंकियों ने सान फ्रांसिस्को में भारत के वाणिज्य दूतावास पर दो बार हमला किया। इसी तरह, मीडिया इस्लामी हमलों को घृणा अपराध बताता है, लेकिन खालिस्तानी समर्थकों के हिंदू मंदिरों पर हमलों को लेकर चुप्पी बरतता है।
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ट्रूडो का विरोध, इस्तीफा मांगा
भारत-कनाडा में कूटनीतिक विवाद के बीच पीएम जस्टिन ट्रूडो का अपनी ही लिबरल पार्टी में विरोध बढ़ गया है। सांसद सीन केसी ने अगले चुनावों से पहले ट्रूडो से पार्टी के नेता पद से इस्तीफा मांगा है। सांसद ने कहा कि देश के लोग उन्हें बहुत बर्दाश्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ट्रूडो की विदाई का समय आ गया है।