भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थर के साथ अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पाने वाले माइकल क्रेमर को कॉलिंग एप्लिकेशन 'स्काइप' पर सूचना मिली थी कि उनका चयन अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए हुआ है। शुरू में उन्हें यह किसी दोस्त का मजाक लगा था, लेकिन बात लंबी होने के बाद भरोसा हुआ।
माइकल क्रेमर ने कहा कि जब मुझे स्काइप मैसेजिंग से नोबेल मिलने की सूचना मिली तो इसका भरोसा ही नहीं हुआ। मुझे लगा कि कोई दोस्त मजाक कर रहा है। बाद में जब सूचना देने वाले व्यक्ति ने उनसे लंबी बात करने की इच्छा जताई और इस बारे में ज्यादा जानकारी दी, तब क्रेमर को अपने नोबेल मिलने का भरोसा हो गया।
हार्वर्ड में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर क्रेमर को अभिजीत बनर्जी और एस्थर के साथ वैश्विक गरीबी कम किए जाने के प्रयासों के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल दिया जाएगा।
प्रभावी ढंग से काम कर रहीं दुनिया की सरकारें
नोबेल पुरस्कार के लिए अपने नाम की घोषणा होने के बाद माइकल क्रेमर ने कहा कि सरकारें अब समस्याओं को समझने और सुलझाने में प्रभावी ढंग से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मैंने इतने सालों में दुनिया का अर्थशास्त्र बदलते देखा है। इस दौरान मैंने देखा है कि शोधकर्ता अब जमीन पर ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ने लगे हैं।
क्रेमर ने कहा कि ऐसा लग सकता है कि वैश्विक गरीबी मिटाना नामुमकिन है, लेकिन हम समय के साथ सीख रहे हैं कि क्या काम करेगा और क्या ठीक नहीं है।