अमेरिका में कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। पीएम ने कहा था कि 1990 में समुदाय के पलायन शुरू होने पर कश्मीर की दफन हो चुकी पहचान के बीच उन्हें दी गई मान्यता पुनर्वास और न्याय की दिशा में एक कदम है। वैश्विक कश्मीरी पंडित प्रवासी संगठन ने कहा कि 19 जनवरी को दुनियाभर में कश्मीरी पंडितों के पलायन दिवस के रूप में चिंहित किया जाता है।
उस वक्त समुदाय की पूरी आबादी रातों रात पलायन को मजबूर हो गई थी। कश्मीरी पंडित प्रवासी समूह ने कहा कि भारतीय संसद में पलायन दिवस की मान्यता को समुदाय द्वारा न्याय और पुनर्वास की बहाली के लिए एक कदम के रूप में देखा जाता है जो तीन दशकों से समुदाय की मांग रही है।
मोदी ने यह भी कहा था कि कोई भी जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्य के तीन हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्रियों के बयानों का समर्थन नहीं कर सकता है जिन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने से कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला द्वारा धारा 370 पर दिए गए बयानों को अस्वीकार्य बताया था।
नायडू ने कनाडा की स्पीकर से कहा, अनुच्छेद-370 खत्म करना आंतरिक मामला
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बृहस्पतिवार को भारत दौरे पर आए कनाडा सीनेट के स्पीकर जॉर्ज जे फुरे से मुलाकात की। इस दौरान नायडू ने उन्हें बताया कि अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म करना भारत का आंतरिक मामला है और यह कदम भारतीय नागरिकों के कल्याण के लिए उठाया गया। उन्होंने बताया कि संविधान में अनुच्छेद-370 अस्थायी प्रावधान था। इसे संसद के दोनों सदनों ने बहुमत से खत्म किया। फुरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।