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मेलानिया ट्रंप ने कहा- भारत दौरे को लेकर उत्साहित हूं..., पीएम मोदी का आभार जताया

Fri, 14 Feb 2020 02:49 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।

सार

  • पहली राजकीय यात्रा का निमंत्रण देने के लिए आभार जताया
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विस्तार
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राष्ट्रपति ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने कहा है कि वे और उनके पति इस माह के अंत में होने वाले भारत दौरे को लेकर बेहद उत्साहित हैं। भारत में अपनी पहली राजकीय यात्रा को लेकर मेलानिया ने ट्वीट किया कि प्रथम महिला के तौर पर भारत की उनकी यात्रा दोनों देशों के बीच निकट रिश्तों का जश्न मनाने का एक अवसर है। उन्होंने भारत आने का निमंत्रण देने के लिए पीएम मोदी का आभार भी जताया।

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मेलानिया ने ट्वीट किया कि 24 और 25 फरवरी को मैं और पोटस (राष्ट्रपति ट्रंप) अहमदाबाद और नई दिल्ली की यात्रा को लेकर उत्सुक हैं। मैं भारत और अमेरिका के बीच घनिष्ठ संबंधों को लेकर भी उत्साहित हूं। दोनों देशों के बीच निकट संबंधों का जश्न मनाने को लेकर मैं और ट्रंप दोनों ही उत्सुक हैं। मेलानिया ट्रंप का यह ट्वीट मोदी के उस ट्वीट के जवाब में था जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रथम महिला की भारत यात्रा को बेहद खास बताया था।

मोदी ने ट्वीट किया था, भारत अपने विशिष्ट अतिथियों का यादगार स्वागत करेगा। यह यात्रा बेहद खास है और यह भारत अमेरिका की मित्रता को आगे और मजबूत करेगी। बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप अहमदाबाद में नवनिर्मित सरदार पटेल स्टेडियम का उद्घाटन करेंगे। साथ ही वे यहां एक रोड शो में भाग लेंगे और साबरमती आश्रम का दौरा भी करेंगे।
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ट्रंप की यात्रा से पहले चार सीनेटरों ने उठाया मानवाधिकारों का मुद्दा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली भारत यात्रा से पहले चार प्रभावशाली अमेरिकी सीनेटरों ने कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति और देश में धार्मिक आजादी का आकलन करने की मांग की। इनमें क्रिस वान हॉलन, टॉड यंग, रिचर्ड जे. डर्बिन और लिंडसे ओ. ग्राहम शामिल हैं। खुद को भारत के लंबे समय तक मित्र के रूप में बताने वाले इन सीनेटरों ने कहा कि सैकड़ों कश्मीरी प्रतिबंधात्मक रूप से हिरासत में हैं।

सीनेटरों के द्विदलीय समूह ने 12 फरवरी को राज्य के सचिव माइक पोम्पियो को लिखे अपने पत्र में कहा कि भारत ने कश्मीरी लोगों के लिए चिकित्सा देखभाल, व्यवसाय और शिक्षा तक पहुंच को बाधित कर दी है। सीनेटरों ने पत्र में सीएए का भी जिक्र किया है।

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कश्मीरी पंडितों ने मोदी के संसद में दिए बयान को सराहा

अमेरिका में कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। पीएम ने कहा था कि 1990 में समुदाय के पलायन शुरू होने पर कश्मीर की दफन हो चुकी पहचान के बीच उन्हें दी गई मान्यता पुनर्वास और न्याय की दिशा में एक कदम है। वैश्विक कश्मीरी पंडित प्रवासी संगठन ने  कहा कि 19 जनवरी को दुनियाभर में कश्मीरी पंडितों के पलायन दिवस के रूप में चिंहित किया जाता है।

उस वक्त समुदाय की पूरी आबादी रातों रात पलायन को मजबूर हो गई थी। कश्मीरी पंडित प्रवासी समूह ने कहा कि भारतीय संसद में पलायन दिवस की मान्यता को समुदाय द्वारा न्याय और पुनर्वास की बहाली के लिए एक कदम के रूप में देखा जाता है जो तीन दशकों से समुदाय की मांग रही है।

मोदी ने यह भी कहा था कि कोई भी जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्य के तीन हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्रियों के बयानों का समर्थन नहीं कर सकता है जिन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने से कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला द्वारा धारा 370 पर दिए गए बयानों को अस्वीकार्य बताया था।

नायडू ने कनाडा की स्पीकर से कहा, अनुच्छेद-370 खत्म करना आंतरिक मामला
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बृहस्पतिवार को भारत दौरे पर आए कनाडा सीनेट के स्पीकर जॉर्ज जे फुरे से मुलाकात की। इस दौरान नायडू ने उन्हें बताया कि अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म करना भारत का आंतरिक मामला है और यह कदम भारतीय नागरिकों के कल्याण के लिए उठाया गया। उन्होंने बताया कि संविधान में अनुच्छेद-370 अस्थायी प्रावधान था। इसे संसद के दोनों सदनों ने बहुमत से खत्म किया। फुरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।
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