एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विरोध जताने के लिए बनाए फेसबुक पेज ‘मार्च 4 जस्टिस’ को पिछले छह दिन में 22 हजार से ज्यादा लोगों ने ज्वाइन किया है। विदशों में रहने वाले ऑस्ट्रेलियाई भी इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले से बने माहौल ने ऑस्ट्रेलिया में #मीटू मूवमेंट की शुरुआत कर दी है। अटार्नी जनरल को लेकर उठे विवाद के बीच कई और महिलाएं सामने आई हैं, जिन्होंने अपने साथ हुए उत्पीड़न की कहानी देश को बताई है।
रक्षा मंत्रालय में दुष्कर्म का आरोप
कुछ दिनों पहले लिबरल पार्टी की पूर्व कर्मचारी ब्रिटनी हिगिन्स ने आरोप लगाया कि 2019 में रक्षा मंत्रालय के कार्यालय में उनके साथ दुष्कर्म किया गया था। हिगिन्स ने कहा कि उन्हें सामने आकर अपनी बात कहने की प्रेरणा यौन उत्पीड़न की पूर्व पीड़िता ग्रेस टेम से मिली। टेम को इस साल जनवरी में वूमन ऑफ द ईयर घोषित किया गया। टेम ने तमाम महिलाओं से अपील की थी कि वे अपने साथ हुई ज्यादती की कहानियां दुनिया को बताएं। इसी साहस के लिए उन्हें ये सम्मान मिला।
हिगिन्स के आरोप के बाद प्रधानमंत्री मॉरिसन ने इस घटना की जांच कराने का एलान किया। उन्होंने वादा किया कि संसद की कार्य संस्कृति में बदलाव लाया जाएगा। लेकिन इस सिलसिले में मॉरिसन की कार्य प्रणाली पर सवाल उठे हैं। मॉरिसन ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि इस मामले में उनके रुख को उनकी पत्नी जेनी से प्रभावित किया। जेनी ने उनसे पिता के रूप में सोचने को कहा कि अगर उनकी बेटी के साथ ऐसा हो, तो उन पर क्या गुजरेगी। इस पर एक महिला रिपोर्टर ने मॉरिसन से प्रेस कांफ्रेंस में सवाल किया कि क्या अगर किसी पुरुष को पत्नी और बेटियां ना हों, तो वह सहानुभूतिपूर्ण निष्कर्ष तक नहीं पहुंचेगा?
गृह मंत्री डुटॉन के रवैए से भड़का गुस्सा
ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री पीटर डुटॉन ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से लेने से इनकार किया था। इन कारणों से लोगों का गुस्सा भड़क गया। खासकर महिलाओं में सरकार की गंभीरता और संवेदनशीलता को लेकर शक पैदा हुआ है। उसका नतीजा सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के रूप में सामने आया है। 15 मार्च को पहली बार सारे देश में एक साथ ऐसे प्रदर्शन होंगे।