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Jaishankar Australia Visit: 'रायसीना डाउन अंडर' में विदेश मंत्री ने QUAD की अहमियत बताई, भारत-चीन पर भी बात

Tue, 05 Nov 2024 03:40 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया)

सार

विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं। उन्होंने आज कैनबरा में 'रायसीना डाउन अंडर' के उद्घाटन सत्र में कई अहम वैश्विक मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने भारत और चीन सीमा पर तनाव घटने और दोनों देशों के सैनिकों की वापसी के मुद्दे पर भी बात की।
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विदेश मंत्री डॉ जयशंकर (वीडियो ग्रैब) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में मंत्रिस्तरीय आयोजन- 'रायसीना डाउन अंडर' के उद्घाटन सत्र में क्वाड देशों की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, कुछ समय पहले उन्होंने इस बात पर विचार करना शुरू किया कि क्वाडिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग (QUAD) ने जिस तरह से काम किया, वह क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि QUAD सदस्यों के साथ भारत के विभिन्न द्विपक्षीय संबंध बहुत हद तक बढ़ गए हैं, यह महत्वपूर्ण है। सबसे अधिक बदलाव ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ है। आज दोनों देश वार्षिक शिखर सम्मेलन की प्रथा पर सहमत हुए हैं। डॉ जयशंकर ने इस बात को भी रेखांकित किया कि पिछले 3 वर्षों में वे 5वीं बार ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर आए हैं।
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देपसांग और डेमचोक में भारत और चीन की सेना के समझौते पर भी बात की
डॉ जयशंकर ने भारत और चीन के बीच एलएसी पर गश्ती को लेकर हुए समझौते और लद्दाख में दोनों देशों की सीमा पर कम होते तनाव का जिक्र करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा, देपसांग और डेमचोक में भारत और चीन की सेना का सीमा से पीछे हटना सकारात्मक संकेत है। भारत ने सैनिकों को अलग करने के तरीकों को प्राथमिकता दी
विदेश मंत्री ने कहा कि हमने 21 अक्टूबर को जो बातचीत की, वह सैन्य वापसी के मुद्दे पर समझौते का अंतिम हिस्सा था। इसका अनिवार्य रूप से मतलब यह है कि 2020 की गर्मियों के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी और भारतीय सैनिकों की तैनाती बेहद चिंताजनक थी। भारत ने सैनिकों को अलग करने के तरीकों की तलाश को प्राथमिकता दी। अब सीमा पर गश्त फिर से शुरू हो चुकी है। इससे सैन्य वापसी का अध्याय पूरा हो चुका है।
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भारत और चीन के संबंध काफी चुनौतीपूर्ण हैं
अब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास डी-एस्केलेशन को लेकर बात हो रही है। पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में हुई द्विपक्षीय बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देशों के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अपने समकक्षों से मिलेंगे। दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश होने के कारण दोनों देशों के संबंध काफी चुनौतीपूर्ण हैं। दोनों देश मोटे तौर पर समानांतर समय सीमा में ही आगे बढ़ रहे हैं। मुद्दों पर संतुलन बनाना बेहद जटिल
विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के प्रभाव और गतिविधियों को देखते हुए यह समझना काफी जटिल है कि आंतरिक मुद्दों और सीमा से जुड़े मुद्दों पर आप कैसे संतुलन बनाने में कामयाब होते हैं।  उन्होंने कहा कि नई अभिव्यक्तियां किस तरह से दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करती हैं, यह समझना भी बेहद महत्वपूर्ण है। वास्तव में दोनों देशों के समक्ष कई जटिल मुद्दे हैं जिसके लिए बहुत अधिक सोच और प्रबंधन की जरूरत होती है।
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