दशकों पहले अमेरिका और ईरान के बीच अच्छे रिश्ते रहे थे। इसका प्रमाण है कि अमेरिकी मदद से ही ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू किया था। 1950 के दशक के अंत में दोनों देशों ने असैन्य परमाणु सहयोग करार पर हस्ताक्षर किए थे। आज दोनों देशों का टकराव पश्चिम एशिया के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक बन गया है।
अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर बम और मिसाइल बरसाकर उन्हें तबाह करने का दावा किया है। अमेरिका का तर्क है कि उसने ऐसा ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए किया है। लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी कि अमेरिका ने ही ईरान में परमाणु कार्यक्रम शुरू कराया था।
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ईरान ने 1950 के दशक के अंत में अमेरिका की तकनीकी सहायता से अपने परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी। उस समय शाह मोहम्मद रजा पहलवी ईरान के शासक थे। उन्होंने अमेरिका के साथ एक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 1970 में ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर किया। उसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को अपनी परमाणु सामग्री घोषित करने की प्रतिबद्धता जताई।
हालांकि, 2000 के दशक की शुरुआत में ईरान के अघोषित परमाणु स्थलों के बारे में जो जानकारी सामने आई उसने विश्व समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी। आईएईए की 2011 की रिपोर्ट में बताया गया कि 2003 तक ही ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कई गतिविधियों के करीब पहुंच गया था। यह जानकारी सामने आने के बाद ईरान की यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया।
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2015 में फिर हुआ समझौता
यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को निलंबित किए जाने के बाद ईरान ने यूरोपीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय ताकतों के साथ फिर बातचीत शुरू की। इसके बाद 14 जुलाई, 2015 को वियना में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका के बीच समझौता हुआ। संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) नामक इस समझौते ने 12 साल के संकट और 21 महीने की लंबी बातचीत के बाद प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए।
पहले कार्यकाल में ट्रंप समझौते से अलग हुए
2016 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद मुश्किल से हासिल यह समझौता खतरे में पड़ गया। पद संभालते ही ट्रंप ने कहना शुरू कर दिया कि अमेरिका इस समझौते से हट जाएगा। 8 मई, 2018 को अमेरिका इससे अलग हो गया और ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए।