ईरान के बंदर अब्बास शहर में शनिवार को भीषण विस्फोट के बाद आग लग गई। ये जानकारी सरकारी समाचार एजेंसी ने दी है। जानकारी के मुताबिक, अभी तक इस धमाके में 14 लोगों की मौत और 750 से ज्यादा लोगों के घायल होने की सूचना है। जिसके बाद सभी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह विस्फोट बंदर अब्बास शहर के रजई बंदरगाह पर हुआ है।
धीरे-धीरे सामने आ रहे विस्फोट के कारण
वहीं इस मामले में सुरक्षा फर्म एम्ब्रे के अनुसार, इस बंदरगाह पर मार्च में चीन से आया सोडियम परक्लोरेट नामक रॉकेट ईंधन जमा किया गया था। यह रासायनिक ईंधन ईरान की मिसाइलों के लिए लाया गया था, जिन्हें गाजा पट्टी में हमास के साथ संघर्ष के दौरान इस्तेमाल किया गया था और अब उन्हें फिर से भरना था। वहीं एम्ब्रे का कहना है कि धमाका इस खतरनाक ईंधन को गलत तरीके से रखने और संभालने की वजह से हुआ।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक जहाज जिसने ये खतरनाक केमिकल लाया था, वह मार्च में इसी इलाके में देखा गया था। हालांकि ईरान ने अब तक इस बात को स्वीकार नहीं किया है कि वह इस ईंधन की खेप ले रहा था, जिसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि ईरान ने इतने खतरनाक रसायनों को बंदरगाह पर लंबे समय तक क्यों रखा, जबकि 2020 में लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए भीषण विस्फोट से सबक लिया जाना चाहिए था, जिसमें 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
आग से लगने से पहले उठता दिखा लाल रंग का धुआं
रजेई बंदरगाह में हुए विस्फोट की सोशल मीडिया फुटेज में विस्फोट से ठीक पहले आग से लाल रंग का धुआं उठता हुआ देखा जा सकता है। इससे पता चलता है कि विस्फोट में कोई रासायनिक यौगिक शामिल था। सोशल मीडिया पर वीडियो में धमाके के बाद काला धुआं निकलता हुआ दिखाई दिया। अन्य वीडियो में विस्फोट के केंद्र से कई किलोमीटर या मीलों दूर इमारतों के शीशे उड़ते हुए दिखाई दिए।
कई किमी दूर तक देखा गया धुएं का गुबार
वहीं इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया वायरल हो रहे हैं, जिसमें धमाके के बाद काले धुएं का विशाल गुबार देखा जा सकता है। बता दें कि, रजई बंदरगाह ईरान के बंदरगाहों में से एक है।
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सिना कंटेनर यार्ड में हुआ विस्फोट
मामले में ईरान के सीमा शुल्क प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि शनिवार का विस्फोट सिना कंटेनर यार्ड में हुआ, जो बंदरगाह और समुद्री संगठन से जुड़ा हुआ है। वहीं ईरानी सरकारी टेलीविजन ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में घटनास्थल पर ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण में लापरवाही की बात सामने आ रही है।
खिड़कियों के शीशे टूटे, घरों को नुकसान
रजई बंदरगाह पर हुए इस भीषण धमाके के कारण कई किलोमीटर दूर तक घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए और घरों-ऑफिसों को काफी नुकसान पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक ये धमाका दोपहर के 12 बजे हुआ है।
रॉकेट फ्यूल में आग लगने से हुआ धमाका
इस मामले में निजी सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने बताया कि, बंदरगाह पर मार्च में सोडियम परक्लोरेट रॉकेट फ्यूल की एक खेप आई थी, जो मिसाइल बनाने में काम आती है। यह ईंधन चीन से आया था और इसका इस्तेमाल ईरान की मिसाइल स्टॉक को दोबारा भरने के लिए किया जाना था। एंब्रे ने कहा, आग लगने की वजह ठोस ईंधन को गलत तरीके से संभालना बताया जा रहा है, जो ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए लाया गया था।'
पीएम मोदी ने घटना पर जताई संवेदना
वहीं प्रधानमंत्री ने मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में आज बंदर अब्बास में हुए विस्फोट में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।