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PoK Protest: जनता का विद्रोह तेज, दमन के बावजूद 1.5 लाख प्रदर्शनकारी रावलकोट की ओर बढ़े; पाकिस्तान पर उठे सवाल

Thu, 11 Jun 2026 04:32 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो\एजेंसी, नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद

सार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। भारी दमन और गोलीबारी के बावजूद 1.5 लाख से अधिक प्रदर्शनकारी रावलकोट की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदर्शन अब जनविद्रोह का रूप ले चुका है।

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गोलीबारी के बाद भी नहीं टूटा हौसला। - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शन के दौरान सैन्य बलों की गोलीबारी में 32 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद भी जनता का हौसला नहीं टूटा है। सुरक्षाबलों की सख्ती को धता बता बुधवार को डेढ़ लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी रावलकोट की ओर बढ़े।

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आटा, बिजली के भारी बिलों व बुनियादी सुविधाओं के लिए शुरू हुआ आंदोलन अब जन विद्रोह का रूप ले चुका है। इस्लामाबाद और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ पीओके के लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। हाथों में बैनर थामे प्रदर्शनकारियों के विशाल समूह रावलकोट, बाग, हट्टियान बाला, कोटली, मीरपुर, सुधनोती, धीरकोट, डडयाल व मुजफ्फराबाद की सड़कों पर मार्च कर रहे हैं।

रावलकोट में इकट्ठा होने के बाद यह जनसमूह मुजफ्फराबाद की ओर कूच करेगा। प्रशासन के सामने 38 सूत्रीय मांगें रखी जाएंगी। उधर, प्रदर्शनकारियों को मुजफ्फराबाद पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासन ने मुख्य राजमार्गों और संपर्क मार्गों को अवरुद्ध कर दिया है। बड़े-बड़े पेड़ों को काटकर सड़कों पर डाल दिया गया है, ताकि काफिलों की रफ्तार रोकी जा सके। इसके बावजूद जनता का हुजूम वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ रहा है।
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चार आयोजकों पर देशद्रोह का मुकदमा
सुरक्षाबलों की गोलीबारी में घायल 38 से अधिक लोग अस्पतालों में जहां जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी हुकूमत ने दमन और तेज कर दिया है। आंदोलन के चार मुख्य आयोजकों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है। पाकिस्तानी ने प्रमुख आंदोलनकारी नेताओं को भारतीय एजेंट करार दिया है। इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी यही हथकंडा अपनाया गया था। इस आंदोलन ने इस्लामाबाद के शासन व नियंत्रण को सीधी चुनौती दे दी है। सेना ने दोबारा ताकत का इस्तेमाल किया तो पीओके की आग पूरे पाकिस्तान को अपनी चपेट में ले सकती है।

ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है
कभी बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में गूंजने वाला नारा ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है, अब पीओके में भी गूंज रहा है। भीड़ को संबोधित करते हुए स्थानीय नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी हुकूमत को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल, रोटी, रोजगार और बुनियादी हक मांग रही निहत्थी जनता को पाकिस्तान सेना आतंकी बता रही है। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और पंजाब से पूछिए कि असली दहशतगर्द कौन है? सब सेना की तरफ अंगुली उठाएंगे। इनका मुखौटा उतर चुका है।

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