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बाजार विश्लेषकों का अनुमान: अमेरिकी शेयर बाजार से बाहर हो जाएंगी लगभग सभी चीनी कंपनियां

Tue, 20 Jul 2021 07:38 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन सरकार ने कुछ समय पहले एलान किया था कि जिन कंपनियों के यूजर्स की संख्या दस या उससे ज्यादा है, उन्हें विदेश में आईपीओ जारी करने के पहले सरकार के साइबर सिक्युरिटी विनियामक की मंजूरी लेनी होगी।
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आईपीओ
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विस्तार
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चीन सरकार चीनी कंपनियों के अमेरिका में आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफर) जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाने वाली है। ये अनुमान बाजार विश्लेषकों ने लगाया है। इस मामले में चीनी कंपनियों की स्वतंत्रता पर पहले ही अंकुश लगाया जा चुका है। गौरतलब है कि चीन सरकार ने कुछ समय पहले एलान किया था कि जिन कंपनियों के यूजर्स की संख्या दस या उससे ज्यादा है, उन्हें विदेश में आईपीओ जारी करने के पहले सरकार के साइबर सिक्युरिटी विनियामक की मंजूरी लेनी होगी।

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बाजार विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि चीनी कंपनियों के विदेशों में शेयर जारी करने संबंधी तमाम नियमों में भी बदलाव की योजना बनाई है। इसके अलावा चीन सरकार ने चीन के डाटा को बाहर ले जाने या बाहरी डाटा का चीन में इस्तेमाल करने के मामलों में नियंत्रण सख्त करने का फैसला किया है। अमेरिका के भी बाजार विशेषज्ञों ने कहा है कि इन नए कदमों से अमेरिका में चीनी कंपनियों के आईपीओ जारी करने पर पूरी रोक सकती है।

बीजिंग स्थित पीकिंग यूनिवर्सिटी के गुआंगहुआ स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में प्रोफेसर पॉल गिलिस ने अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग से कहा- ‘अब इस बात की संभावना नहीं है कि अगर पांच से दस साल तक अमेरिकी शेयर बाजार में कोई लिस्टेड (दर्ज) चीनी कंपनी होगी।’ गौरतलब है कि अभी हाल तक 248 चीनी कंपनियां अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड थीं। उनमें आठ चीन की सरकारी कंपनियां भी शामिल थीं। अमेरिकी में लिस्टेड ज्यादातर चीनी कंपनियां हाई टेक क्षेत्र की थीं। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी के मुताबिक अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड चीनी कंपनियों का कुल मूल्य 2.1 ट्रिलियन डॉलर था।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में लिस्टेड चीनी कंपनियों पर नजर रखने वाले फर्म- इनवेस्को गोल्डेन ड्रैगन चाइना ईटीएफ ने खबर दी है कि पिछले छह महीनों में अमेरिका में लिस्टेड चीनी कंपनियों की संख्या में एक तिहाई की गिरावट आई है। इसकी वजह चीन में सख्त किए गए नियम हैं। चीनी की कार्रवाई के हो रहे असर की तरफ दुनिया का ध्यान बीते जून में गया, जब चीनी कंपनी डिडी ग्लोबल इन्क ने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में खुद को लिस्ट कराने की पहल की। उसने ये पहल चीनी विनियामकों की आपत्तियों के बावजूद की।

बताया जाता है कि चीनी विनियामकों ने डिडी को सलाह दी कि वह खुद हांगकांग में लिस्ट कराए। लेकिन डिडी के अड़े रहने के बाद चीन सरकार ने उसके खिलाफ साइबर सिक्युरिटी संबंधी जांच कराने का एलान कर दिया। उससे इस कंपनी के शेयरों के भाव में 20 फीसदी की गिरावट आई। अमेरिका में लिस्टेड चीनी कंपनियां अलीबाब और टेन्सेंट भी हाल में चीनी अधिकारियों के जांच के दायरे में आई हैँ। 

कुल मिला कर अमेरिका में चीनी कंपनियों के शेयर भाव में इस महीने 30 फीसदी की गिरावट आई है। चीनी अधिकारी अब कंपनियों को हांगकांग में लिस्ट कराने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन वहां भी लिस्ट होने के पहले कंपनियों के लिए साइबर सिक्युरिटी मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी मंजूरी मिलने के बाद लिस्ट हुई कंपनियां निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक होंगी। जानकारों का कहना है कि अभी ऐसे नियम लागू कर दिए गए हैं, जिनसे कंपनियों के लिए आईपीओ निकालना बहुत मुश्किल हो गया है। इसकी मंजूरी प्रक्रिया में फिलहाल काफी समय लग रहा है।

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