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वैज्ञानिकों ने किया समुद्री कचरे पर शोध, बताया कैसी थी 6.6 करोड़ साल पहले पृथ्वी की जलवायु

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Tanuja Yadav Updated Thu, 17 Sep 2020 07:38 PM IST
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समुद्री कचरे से जाना 6.6 करोड़ साल पहले कैसा थी पृथ्वी की जलवायु - फोटो : iStock

पिछले कुछ सालों से दुनिया में पर्यावरण को लेकर किए जा रहे शोधों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के संकेत दिन प्रतिदिन खतरनाक होते जा रहे हैं। ऐसे में तमाम वैज्ञानिक और पर्यावरणविदों ने धरती की जलवायु प्रक्रियाओं को समझने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध करने शुरू कर दिए हैं। 

ऐसे ही एक शोध में लंदन के वैज्ञानिकों ने महासागरों में मौजूद कचरे से पृथ्वी की जलवायु में पिछले 6.6 करोड़ सालों में आए बदलाव का पता लगाया है। इस शोध में पिछले 6.6 करोड़ सालों में पृथ्वी की जलवायु में कैसा परिवर्तन आया, उस समय पृथ्वी की जलवायु कैसी थी, ऐसे सवालों के जवाब मिले हैं।

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समुद्री कचरे से जाना 6.6 करोड़ साल पहले कैसा थी पृथ्वी की जलवायु - फोटो : iStock
पिछले कुछ सालों से दुनिया में पर्यावरण को लेकर किए जा रहे शोधों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के संकेत दिन प्रतिदिन खतरनाक होते जा रहे हैं। ऐसे में तमाम वैज्ञानिक और पर्यावरणविदों ने धरती की जलवायु प्रक्रियाओं को समझने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध करने शुरू कर दिए हैं। 

ऐसे ही एक शोध में लंदन के वैज्ञानिकों ने महासागरों में मौजूद कचरे से पृथ्वी की जलवायु में पिछले 6.6 करोड़ सालों में आए बदलाव का पता लगाया है। इस शोध में पिछले 6.6 करोड़ सालों में पृथ्वी की जलवायु में कैसा परिवर्तन आया, उस समय पृथ्वी की जलवायु कैसी थी, ऐसे सवालों के जवाब मिले हैं।

पृथ्वी की चार अलग अवस्थाएं

इस शोध के जरिए वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की चार अलग अवस्थाएं पाई हैं, जो कि हॉट हाउसेज, हैम हाउसेज, कूल हाउसेज और आइस हाउसेज हैं। इस अध्ययन की सहलेखिका और लंदन में यूसीएल अर्थ साइंस की डॉ. एना जॉय ड्रयूरी का मानना है कि इन अवस्थाओं पर पृथ्वी की धुरी और उसके सूर्य के चक्कर लगाने वाली कक्षा का खास प्रभाव है।

इस अध्ययन के नतीजे साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए, इसमें टीम सेनोग्रिड ने एक जलवायु संदर्भ वक्र तैयार किया है। ये वक्र जलवायु के पिछले रिकॉर्ड को बताता है। इसके अलावा यह भी पता चलता है कि डायनासॉर के विलुप्त होने के बाद पृथ्वी की जलवायु में किस तरह के परिवर्तन आए हैं।

अध्ययन करने के पीछे का कारण क्या था?

डॉ एना जॉय ड्रयूरी ने इस अध्ययन के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि हमने यह जानने का प्रयास किया कि पृथ्वी के सामान्य जलवायु परिवर्तन विविधताएं आखिर क्या हैं और पृथ्वी पिछली घटनाओं से कितनी जल्दी उबर सकी। जब हम इस बारे में बात करते हैं कि पृथ्वी ने इससे ज्यादा गर्म जलवायु को झेला है तो ये जलवायु परिवर्तन के संकेत रहे थे जो कि हमारे आज  संसार से बहुत अलग थे।

वैज्ञानिकों ने किस तरह किया विश्लेषण

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने समुद्र तल से जमा किए नमूनों का विश्लेषण किया, ये नमूने पिछले पांच दशकों यानि कि 50 सालों से इकट्ठा किए गए थे। उन्होंने एक गणितीय विश्लेषण का इस्तेमाल कर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में बदलाव से संबंधित चार जलवायु हालातों की पहचान की।

शोधकर्ताओँ ने जानकारी देते हुए बताया कि 5.5 करोड़ साल पहले पैलेयोसीन-एयोसीन थर्मल मैक्जिमम (PETM)  काल में बहुत तेजी से ग्लोबल वॉर्मिंग हुई थी। उस दौरान वायुमंडल में काफी ज्यादा मात्रा में कार्बन आ गया था, जिसका परिणाम यह हुआ कि पृथ्वी की जलवायु बहुत गर्म हो गई थी। 

इसके अलावा एयोसीन काल यानि कि 3.4 करोड़ साल पहले अंटार्कटिका में बर्फ ढकनी शुरू हुई थी, यानि कि बर्फ तेजी से बन रही थी। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि पृथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर गिरने लगा था और जलवायु की अवस्था कूल हाउसेज स्थिति में प्रवेश करने लगी थी।

वैज्ञानिकों को मिली बेहतर जानकारी

शोध के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब वो सटीक तौर पर जानते हैं कि पृथ्वी कब बहुत गर्म  थी और कब बहुत ठंडी थी। इसके अलावा वो इसमें अंतर्निहित गतिविज्ञान और संबंधित प्रक्रियाओं को भी समझने लगे हैं। इसके अलावा वैज्ञानिकों को एक बेहतर जानकारी भी मिली है।

इस शोध में सबसे दिलचस्प बात सामने यह आई है कि 6.6 करोड़ साल पहले से 3.4 करोड़ साल पहले तक पृथ्वी आज के मुकाबले और भी ज्यादा गर्म थी। यह उस समय के समकक्ष है जब मानवीय गतिविधि के कारण ऐसे बदलाव आ सकते हैं। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि 30 साल पहले ही पृथ्वी की जलवायु आइसहाउसेस रही है, इसमें गर्म और ठंडे दोनों मौसम रहे।

ग्रीन हाउस गैसों से पृथ्वी की जलवायु हॉट हाउस की तरफ बढ़ रही है, ऐसा एयोसीन काल से नहीं देखा गया था। डॉ ड्रयूरी का कहना है कि हॉट हाउसेज की गर्म जलवायु के समय से पृथ्वी की जलवायु पिछले पांच करोड़ साल से ठंडी होती रही है। लेकिन आज के हालात में जल्द हो रहे बदलाव इस रफ्तार को बदल रहे हैं। ये विविधताएं पिछले 6.6 करोड़ सालों में सबसे अधिक है।
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