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US: नाविकों की मौत पर भारत का विरोध खारिज; अमेरिका ने कहा- होर्मुज में आदेश मानें, नाकेबंदी का उल्लंघन न करें

Sat, 13 Jun 2026 07:38 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।

सार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी आदेशों का पालन करने तथा ईरानी तेल के अवैध परिवहन पर सख्त रुख दोहराया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रधान उप प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। पढ़िए रिपोर्ट-
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टॉमी पिगोट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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ईरान के खिलाफ एकतरफा हमला करने वाला अमेरिका पश्चिम एशिया में दादागीरी पर उतर आया है। मालवाहक जहाजों पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर विरोध जताने पर अमेरिका ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन या ईरानी तेल का अवैध परिवहन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। 
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने बताया कि मार्को रुबियो ने इस दौरान वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ईरानी तेल के अवैध परिवहन को भी अस्वीकार्य बताया। 

एस जयशंकर ने क्या कहा था?
इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा था, आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई पर भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। वाणिज्यिक शिपिंग पर इस तरह की घातक कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता। 
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अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत
ओमान की खाड़ी में बुधवार को अमेरिका ने एमटी सेटेबेल्लो नाम के जहाज पर हमला किया था। अमेरिकी सेना ने हमले के बाद आरोप लगाया था कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों पर जारी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर मौजूद 24 भारतीय नाविकों में से 21 को बचा लिया गया था। लेकिन बाद में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई। 
 
अमेरिका के हालिया हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर देश में भारी आक्रोश है। इस गंभीर मुद्दे को भारत ने अमेरिकी प्रशासन के सामने उठाया है। पूर्व राजनयिक वीना सीकरी ने इस कदम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात कर भारत की गहरी नाराजगी दर्ज कराई है। यह बातचीत शीर्ष स्तर पर देश के कड़े रुख को बयां करती है। ओमान की खाड़ी में भारतीय नागरिक जहाजों पर हुए तीन हमलों से भारत बेहद आहत है।

पूर्व राजनयिक रविंदर सचदेव ने क्या कहा?
विदेश मामलों के विशेषज्ञ रविंदर सचदेव ने कहा कि तीन भारतीय नाविकों की मौत के मामले पर भारत का आधिकारिक रुख बहुत सख्त है। इसे युद्ध अपराध भी कहा जा सकता है। सचदेव ने कहा कि इन नाविकों के परिवार और सांसद अमेरिका सरकार से मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, निश्चित रूप से, भारत सरकार का कूटनीतिक रुख बहुत मजबूत है। लेकिन इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि यह एक अपराध है या कहें तो युद्ध अपराध है। इसमें आम नागरिकों की बिना वजह हत्या की जा रही है। अब तक जो जानकारी है, उससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना जहां भी काम करती है, वह नागरिक जीवन की परवाह किए बिना कार्य करती है। उन्होंने ऐसा कैरिबियन क्षेत्र में भी किया है। 

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सचदेव ने कहा कि सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि अन्य लोग भी न्यूयॉर्क में कानूनी मामला दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा, जहां तक नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की बात है, वे इन्हें अपराधी कहते हैं, लेकिन वे नागरिक होते हैं, इसलिए कोई जवाबदेही नहीं बनती। इसलिए यह मामला आगे ले जाया जा सकता है। सबसे पहले परिवार मुआवजे की मांग कर सकते हैं। उन्हें अमेरिका से मुआवजा मांगना चाहिए। इसमें केवल सरकार का सख्त रुख नहीं, बल्कि जनता की भी भूमिका है। कई बार सरकार संतुलित रुख अपनाती है। लेकिन संसद सदस्य और अन्य लोग अपनी आवाज उठा सकते हैं कि मुआवजा मिलना चाहिए। अगर न्यूयॉर्क या किसी अन्य जगह ठीक से मामला दायर किया जाए और मजबूत केस बनाया जाए, तो 5–10 साल में परिणाम मिल सकते हैं। 
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सचदेव ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर पूरी जानकारी में नहीं होते या सवालों को टालते हैं। उन्होंने कहा कि असली बात यह है कि अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम), जो इस क्षेत्र में अभियानों को संभालता है, उसने स्वीकार किया है कि मिसाइलें उसी ने दागी हैं। 
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