अमेरिका में महंगाई की बढ़ी दर पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि के मुद्दे पर सत्ताधारी डेमोक्रेटिक और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी में सहमति बनने के संकेत हैं। लेकिन एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में आम राय है कि फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने से भी अमेरिका वासियों को महंगाई की समस्या से ज्यादा राहत नहीं मिलेगी। जबकि एशियाई बाजारों में मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड आदि तमाम देशों से मिली खबरों का सार यही है कि वहां के सेंट्रल बैंक अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने से होने वाली उथल-पुथल के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक के रुख में संभावित बदलाव की वजह से एशिया भर के बाजारों में अनिश्चिय का भाव लगातार बना हुआ है। फेडरल रिजर्व अमेरिका का सेंट्रल बैंक है।
कम ब्याज दरों से बढ़ी मुद्रास्फीति दर
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जिरोम पॉवेल ने बीते दिनों कहा कि अमेरिका में मुद्रास्फीति दर में बढ़ोतरी का कारण निम्न ब्याज दरें हैं। इसलिए अब फेडरल रिजर्व को सुधार के कदम उठाने होंगे। मार्केट विश्लेषण करने वाली एजेंसी थिंकमार्केट्स से जुड़े विश्लेषक फव्वाद रज्जाकजादा ने कहा है- ‘अमेरिकी नीतिकार ऐसे कदम उठाने के लिए तैयार हो गए हैं, भले उस कारण वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचे।’
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज ने चिंता जताई है कि इस मौके पर अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाने से दूरगामी नुकसान होगा। स्टिग्लिट्ज पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। उन्होंने कहा कि ब्याज दर बढ़ाने से सप्लाई चेन की रुकावटें दूर नहीं होंगी, जो बढ़ रही महंगाई का असल कारण हैँ।
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जिरोम पॉवेल एक अलग मकसद को ध्यान में रख कर चल रहे हैं। वे उन विश्लेषकों की राय से सहमत हैं कि कोई कदम ना उठाने से फेडरल रिजर्व की साख प्रभावित हो रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या फेडरल रिजर्व डॉलर को उचित सहारा देने, ब्याज दरों का प्रबंधन करने, और शेयर बाजारों में स्थिरता कायम रखने में सक्षम है। पॉवेल संभवतया फेडरल रिजर्व की सक्षम भूमिका के बारे में दुनिया को संदेश देना चाहते हैं।
चार बार बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
एक कैपिटल मैनेजमेंट कंपनी से जुड़े हेज फंड मैनेजर बिल अकरमैन वकालत की है कि अपनी साख कायम रखने के लिए फेडरल रिजर्व को कदम उठाना चाहिए। उसे चौंका देने वाला कदम उठाना चाहिए, ताकि वह दिखा सके कि वह महंगाई को रोकने के लिए कृत-संकल्प है। इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन ने कहा है कि इस साल फेडरल रिजर्व चार बार ब्याज दर बढ़ाए, इस बात की ठोस संभावना है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में चल रही इन चर्चाओं से एशियाई बाजारों में संशय का माहौल है। यहां आम राय यह है कि अमेरिका के लिए ब्याज दर बढ़ाने का यह सही समय नहीं है। कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वायरस के कारण आई महामारी लहर अभी जारी है। उधर यूक्रेन के मसले पर रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े तनाव ने ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं। ऐसे मौके पर शेयर बाजारों में उथल-पुथल से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए कठिन चुनौती पैदा होगी, जिससे निपटने के लिए वे पूरी तरह तैयार नहीं हैं।