ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) एक घातक रोग है, जिसके कारण हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। एक आंकड़े के मुताबिक, साल 2021 में टीबी से कुल 16 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। वहीं, भारत ने 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य बनाया है। इसी को लेकर, भारत ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिससे तपेदिक यानी टीबी के मामले का अनुमान लगाया जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सभा
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 76वीं विश्व स्वास्थ्य संगठन की सभा (WHO) की शुरुआत हुई है। इस दौरान यहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने टीबी का अनुमान लगाने के लिए उपकरण तैयार किया है। वहीं उन्होंने बताया कि भारत में टीबी के मामलों में कमी दर्ज की गई है।
वैश्विक स्तर पर भी आई कमी
मंडाविया के अनुसार, देश में साल 2015 से 2022 तक टीबी के मामलों में 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं, 10 प्रतिशत की वैश्विक कमी दर को पार कर गया है। इसके अतिरिक्त, इसी अवधि के दौरान भारत में टीबी मृत्यु दर में 15 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, वैश्विक स्तर से तुलना करने पर मौतों की दर में करीब 5.9 प्रतिशत की कमी देखी गई है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र देश है, जिसने टीबी के मामले का अनुमान लगाने के लिए अपना तंत्र विकसित किया है। मंडाविया ने कहा कि भारत अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक रिपोर्ट से काफी पहले बीमारी का सही आंकड़ा पता कर सकता है।
2025 तक टीबी को खत्म करना लक्ष्य
उन्होंने वैश्विक सतत विकास लक्ष्य से पांच साल पहले 2025 तक टीबी को खत्म करने के प्रयास में भारत के समर्पण की सराहना की है। मंडाविया ने कहा कि हमने मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए 1.5 लाख से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यहां तक कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करता है।
मंत्री ने टीबी के खिलाफ लड़ाई में एक प्रभावी टीका विकसित करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इस बीमारी को खत्म करने के लिए दुनिया को अधिक से अधिक सहयोग के साथ काम करने की जरूरत है ताकि नवीनतम निदान और उपचार के विकल्पों तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके।