पाकिस्तान की विशेष अदालत ने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से संबंधित सामग्री डालने के मामले में एक व्यक्ति को पांच साल की सजा सुनाई है। यह देश के नए साइबर आपराधिक कानून के तहत सजा सुनाए जाने का पहला मामला है।
एफआईए के वकील मुनम बशीर चौधरी ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 12 गवाहों को पेश किया। इसमें एफआईए के असिस्टेंट डायरेक्टर नईम जफर भी शामिल थे, जिन्होंने अदालत में अपनी तकनीकी विश्लेषण रिपोर्ट सौंपी थी। एफआईए साइबर अपराध के प्रमुख सरफराज चौधरी ने कहा कि अदालत ने साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार को व्यापक स्तर पर अभियान चलाने निर्देश दिया है।
पाकिस्तान में ईशनिंदा का काला इतिहास रहा है। अल्पसंख्यकों से निजी दुश्मनी निकालने के लिए इस कानून के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। विश्व समुदाय इसको लेकर चिंता जताता रहा है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दस साल से जेल में बंद एक ईसाई महिला आसिया बीबी को ईशनिंदा के आरोपों से बरी कर दिया था। शीर्ष अदालत के इस फैसले का पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था और कई शहरों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। चार बच्चों की मां आसिया फिलहाल परिवार के साथ कनाडा में रह रही है।