पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना चार मई को होनी है। इससे पहले ही राज्य में हलचल तेज हो गई है। नतीजों से ठीक दो दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बड़ी बैठक बुलाई है।
ममता बनर्जी को किस बात का सता रहा डर?
ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की 'प्रचंड जीत' का पूरा भरोसा जताया है, लेकिन उन्हें मतगणना में धांधली का डर भी सता रहा है। उन्होंने नतीजों से पहले ही ईवीएम से छेड़छाड़ किए जाने की अपनी चिंताएं बार-बार सबके सामने जाहिर की हैं।
मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों के अंदर बने स्ट्रान्ग रूम के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने दावा किया है कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। फिर भी, शुक्रवार शाम को ममता बनर्जी ने अपने आवास पर अभिषेक बनर्जी के साथ घंटों तक बंद कमरे में चुनाव नतीजों और काउंटिंग के दिन की रणनीति पर चर्चा की।
मतगणना केंद्रों पर गुरुवार रात को क्यों हुआ था भारी बवाल?
गुरुवार देर रात कोलकाता के दो मतगणना केंद्रों पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला था। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि 29 अप्रैल को संपन्न हुए विधानसभा चुनाव की सील बंद ईवीएम वाले स्ट्रान्ग रूम में पारदर्शिता की कमी है। गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सखावत मेमोरियल स्कूल के मतगणना केंद्र पर पहुंच गई थीं और करीब चार घंटे तक वहां डटी रहीं। वहीं, खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर टीएमसी नेता शशि पांजा और कुणाल घोष ने धरने पर बैठकर अपना कड़ा विरोध जताया। इन नेताओं का सीधा आरोप था कि टीएमसी एजेंटों की गैरमौजूदगी में स्ट्रॉन्गरूम के अंदर कुछ अनधिकृत और संदिग्ध गतिविधियां की जा रही थीं।