मालदीव के विदेश मंत्रालय ने 21 नवंबर को आयोजित हुई 'चीन-हिंद महासागर क्षेत्र विकास सहयोग मंच' की बैठक में हिस्सा लेने की बात से इनकार किया।
मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, विदेश मंत्रालय स्पष्ट करना चाहता है कि मालदीव सरकार ने विकास सहयोग मंच की बैठक में भाग नहीं लिया और 15 नवंबर, 2022 को चीन (पीआरसी) के दूतावास में भाग नहीं लेने के अपने फैसले से अवगत कराया।
चीन अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी (सीआईडीसीए) ने 21 नवंबर 2022 को आयोजित 'चीन-हिंद महासागर क्षेत्र विकास मंच' मालदीव की भागीदारी का आरोप लगाते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया था।
मालदीव गणराज्य के संविदान के अनुच्छेद 115 (जे) के अनुसार, केवल सेवारत राष्ट्रपति ही देश की विदेश नीति का निर्धारण, संचालन और निरीक्षण कर सकते हैं। राष्ट्रपति ही विदेशी राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ राजनीतिक संबंधों का संचालन कर सकते हैं।
बयान में कहा गया है कि इस विशिष्ट बैठक के लिए मालदीव सरकार द्वारा कोई आधिकारिक प्रतिनिधित्व नहीं किया गया था।
श्रीलंका, पाकिस्तान और मालदीव चीन के सबसे बड़े कर्जदारों में से हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, चीना का पाकिस्तान पर 77.3 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज बकाया है। मालदीवा का कुल कर्ज उसकी राष्ट्रीय आय (जीएनआई) का 31 फीसदी है।
ऑस्ट्रेलिया ने भी नहीं बैठक में हिस्सा
मालदीव के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भी रविवार को स्पष्ट किया उसने 21 नवंबर को आयोजित चीन-भारत क्षेत्र विकास सहयोग मंच की बैठक में भाग नहीं लिया। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बैरी ओ'फारेल ट्वीट कर यह बात कही।
उन्होंने ट्वीट कर कहा, मीडिया रिपोर्ट्स के विपरीत ऑस्ट्रेलियाई सरकार के किसी भी अधिकारी ने चीन-हिंद महासागर फोरम की बैठक में भाग नहीं लिया।