चीन में 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर पहला बड़ा अभियान ‘दुल्हन की कीमत’ पर नियंत्रण लगाने के लिए छेड़ा गया है। साथ ही तड़क-भड़क वाली शादियों को नियंत्रित करने की मुहिम भी शुरू की गई है। खास कर ये दोनों अभियान ग्रामीण इलाकों में चलाए जाए जाएंगे।
चीन सरकार ने इस बारे में एक दस्तावेज जारी किया है। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक नए अभियान के तहत स्थानीय प्रशासनों को पुरानी पड़ गई परंपराओं को बदलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें कहा जाएगा कि गांवों में वे लोगों को नियम और रिवाज बदलने के लिए प्रेरित करें। साथ ही कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को कहा जाएगा कि वे खुद सादगी का उदाहरण पेश करें।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक ब्राइड प्राइस यानी दुल्हन की कीमत चीनी समाज की पुरानी परंपरा है। इसके तहत विवाह के समय लड़के के घरवाले लड़की के परिजनों को उपहार देत हैं। पुराने जमाने में इसे सद्भावना के प्रतीक के रूप में दिया जाता था। लेकिन नए जमाने में इसका व्यापारीकरण हो गया है। अभी शादी के समय लड़की के परिजन बड़ी मांग पेश कर देते हैं।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक इसका नतीजा यह हुआ है कि कम आय वाले परिवारों में लड़के की शादी के लिए बचत करनी पड़ती है। इसका असर उनके जीवन स्तर पर पड़ता है। ऐसी घटनाएं भी हुई हैं कि महंगा उपहार न मिलने पर लड़कियों ने पुराने प्रेम संबंधों को तोड़ लिया है। इस रूप में दुल्हन की कीमत की परंपरा एक बड़ी सामाजिक समस्या बन गई है।
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के वर्षों में कई शहरों में इस परिपाटी पर काबू पाने की कोशिशें की गई हैं। पिछले सितंबर में आठ राष्ट्रीय विभागों ने एक नोटिस जारी कर दुल्हन की अत्यधिक कीमत और तड़क-भड़क वाली सादियों को रोकने का नोटिस जारी किया था। लेकिन यह पहला मौका है, जब चीन सरकार ने इस बारे में राष्ट्रीय अभियान छेड़ने का फैसला किया है।
हाल में हुए प्रयासों के तहत जियांग्शी प्रांत के गुआंगचोंग जिले में पिछले सितिबंर में दस जोड़ों की सामूहिक शादी कराई गई। उस दौरान दुल्हन की कीमत के रूप में कोई लेनदेन नहीं हुआ। उन शादियों की लाइवस्ट्रीमिंग की गई, जिसे 40 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा।
इसी प्रांत शांगरावो शहर के एक अधिकारी ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि कुछ शहरी क्षेत्रों में दुल्हन की कीमत हद पार कर गई है। कई जगहों पर इस रूप में एक से डेढ़ लाख युवान (14 से 22 हजार डॉलर) तक की मांग की गई है। कुछ ग्रामीण इलाकों में तो पौने तीन लाख युवान तक की मांग किए जाने की खबर मिली है। दुल्हन की कीमत लेने का चलन अब कुछ ऐसे इलाकों में भी फैल गया है, जहां पहले ऐसी कोई परिपाटी नहीं थी।
समाजशास्त्रियों के मुताबिक इस चलन के फैलने का कारण समाज में लड़कियों की कम संख्या भी है। वन चाइल्ड पॉलिसी के दिनों में लोगों में बेटे की चाहत थी। तब जन्म पूर्व लिंग परीक्षण के कारण लड़कियों का कम जन्म हुआ। अब कई मामलों में लड़कियों की कम संख्या का फायदा उठाने की कोशिश दुल्हन के माता-पिता कर रहे हैं।