फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को नई राष्ट्रीय सैन्य सेवा पहल की घोषणा की। यह पहल इसलिए की गई है, क्योंकि फ्रांस अपने सशस्त्र बलों को मजबूत करना चाहता है, ताकि यूरोपीय देशों पर रूस के बढ़ते खतरे का सामना किया जा सके।
मैक्रों ने घोषणा की कि 18 और 19 साल के स्वयंसेवक अगले साल 10 महीने की नई सैन्य सेवा योजना में शामिल होना शुरू करेंगे। फ्रैंच आल्प्स में वार्सेस सैन्य अड्डे पर अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा कि अगले गर्मियों से एक नई राष्ट्रीय सेवा योजना धीरे-धीरे शुरू की जाएगी। इसमें युवा स्वयंसेवक केवल के के प्रमुख क्षेत्रों में ही सेवा नहीं करेंगे, बल्कि विदेश में भी फ्रांसीसी सैन्य अभियानों में भाग लेंगे।
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इस साल की शुरुआत में मैक्रों ने फ्रांसीसी युवाओं को सैन्य सेवा में स्वेच्छा से भाग लेने का नया विकल्प देने की अपनी योजना की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस में 1996 में खत्म हो चुकी अनिवार्य सैन्य सेवा को फिर से लागू करने का विचार नहीं है। उन्होंने बताया कि रूस का यूक्रेन पर आक्रमण यूरोप के लिए 'बड़े खतरे' का संकेत है, इसलिए फ्रांस अपनी रक्षा को मजबूत करना चाहता है। मैक्रों ने रेडियो आरटीएल को मंगलवार को बताया, जिस दिन आप रूस के प्रति कमजोरी का संकेत देंगे, जिसने पिछले 10 वर्षों में फिर से एक साम्राज्यवादी ताकत बनने का रणनीतिक फैसला लिया है, यानी जहां भी हम कमजोर हैं, वहां वह आगे बढ़ेगा..वह आगे बढ़ता रहेगा।
ईयू के देशों में फ्रांस की सेना दूसरी सबसे बड़ी
मैक्रों ने अगले दो वर्षों में अतिरिक्त सैन्य खर्च के रूप में 6.5 बिलियन यूरो (7.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की घोषणा की। उन्होंने कहा कि फ्रांस 2027 में वार्षिक रक्षा खर्च में 64 बिलियन यूरो खर्च करने का लक्ष्य रखेगा, जो उनके दूसरे कार्यकाल का अंतिम वर्ष होगा। यह 2017 में राष्ट्रपति बनने के समय 32 बिलियन यूरो के वार्षिक खर्च का दोगुना होगा। फ्रांस की सेना में वर्तमान में करीब दो लाख सक्रिय सैन्य कर्मी और 40 हजार से अधिक आरक्षित कर्मी हैं, जो इसे यूरोपीय संघ (ईयू) में पोलैंड के बाद दूसरी सबसे बड़ी सेना बनाते हैं। फ्रांस 2030 तक आरक्षित कर्मियों की संख्या एक लाख तक बढ़ाना चाहता है।
फ्रांस के नए सेना प्रमुख के बयान से क्यों हुआ विवाद
फ्रांस के नए सेना प्रमुख जनरल फेबियन मंडॉन ने पिछले हफ्ते चेतावनी दी कि देश को रूस के संभावित संघर्ष की स्थिति में 'अपने बच्चों के बलिदान की तैयारी' करनी होगी। उनके इन शब्दों से विवाद भी खड़ा हुआ। जनरल मंडॉन ने कहा कि रूस ने 2008 में जॉर्जिया के 20 फीसदी क्षेत्र, 2014 में यूक्रेन का क्रीमिया और 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण किया। दुर्भाग्य से, आज रूस 2030 तक हमारे देशों के साथ टकराव की तैयारी कर रहा है। वह इसके लिए खुद को संगठित कर रहा है और आश्वस्त है कि इसके अस्तित्व का दुश्मन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) है।
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अग्रिम मोर्च पर नहीं भेजे जाएंगे युवा: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
मैक्रों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सैन्य सेवा के स्वयंसेवकों को अग्रिम मोर्चे पर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, हमें किसी भी भ्रम को तुरंत दूर करना चाहिए कि हम अपने युवाओं को यूक्रेन भेजने जा रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। फ्रांस अकेला यूरोपीय देश नहीं है जो अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है।
कई देशों ने की नई स्वैच्छिक सैन्य सेवा योजना की घोषणा
जर्मनी भी अधिक युवाओं की भर्ती के लिए प्रयास तेज कर रहा है, खासकर नई स्वैच्छिक सैन्य सेवा कार्यक्रम के माध्यम से। इस योजना को संसद की मंजूरी मिलना बाकी है। बेल्जियम के रक्षा मंत्री ने इस महीने 17 साल के युवाओं को पत्र भेजा और उन्हें अगले साल सैन्य सेवा के लिए पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि 18 से 25 वर्ष के बीच 500 अभ्यर्थियों का चयन किया जा सके और सितंबर में कार्यक्रम शुरू किया जा सके। पोलैंड ने भी हाल ही में एक नई स्वैच्छिक सैन्य प्रशिक्षण योजना शुरू की है और 2027 से हर साल एक लाख स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है, ताकि आरक्षित कर्मियों की सेना तैयार की जा सके। दस यूरोपीय देशों ऑस्ट्रिया, साइप्रस, क्रोएशिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, ग्रीस, लाटविया, लिथुआनिया और स्वीडन में अनिवार्य सैन्य सेवा है।