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ब्राजील में लूला की वापसी: बोल्सोनारो ने हार मानने से किया इनकार, चुनावी नतीजे रद्द करने की उठाई मांग

Mon, 26 Oct 2026 08:07 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

ब्राजील में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने कड़े मुकाबले में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया। हार के बाद बोल्सोनारो ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नतीजे रद्द करने की मांग की है। 

 

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फ्लावियो बोल्सोनारो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर जीत हासिल की। इस जीत के साथ देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला। चुनाव में हार के बाद बोल्सोनारो ने नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और चुनाव रद्द करने की मांग उठाई। लूला की जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में वामपंथी विचारधारा वाले नेताओं की स्थिति मजबूत हुई है।

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करीब 44 लाख वोटों से मिली जीत
ब्राजील के चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, सभी वोटों की गिनती पूरी होने के बाद लूला को कुल 51.8 फीसदी वोट मिले। उन्होंने बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों से पीछे छोड़ दिया। नतीजों की घोषणा के बाद लूला के समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया। साओ पाउलो में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए, जबकि रियो डी जनेरियो में गाड़ियों के हॉर्न बजाकर जीत का जश्न मनाया गया।
 
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लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोगों ने किया मतदान: लूला
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने कहा कि उनकी पार्टी ने लोगों को यह समझाने में सफलता हासिल की कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी जीत के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किए गए विदेशी हस्तक्षेप को भी मात मिली है। लूला ने साफ कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश का पिछवाड़ा नहीं है और देश अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार देश चलाने के तरीके में बदलाव करेगी और फैसले लेने की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, ताकि जनता की आवाज को अधिक महत्व मिल सके।

हार मानने को तैयार नहीं बोल्सोनारो
चुनाव में हार के बाद बोल्सोनारो ने मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे असाधारण कदम बताते हुए नतीजों को रद्द करने की मांग की। हालांकि, मतदान का समय बढ़ाने की मांग दोनों उम्मीदवारों की ओर से की गई थी। लूला के समर्थकों ने कुछ शहरों में बसों से मतदान केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी की शिकायत की थी, जबकि बोल्सोनारो के समर्थक इलाकों में भारी बारिश के कारण दिक्कतें सामने आई थीं।

मतदान का समय बढ़ने से फैला भ्रम
मतदान खत्म होने से कुछ मिनट पहले ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्रिस्टियानो जैनिन ने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। इस फैसले से कई मतदान केंद्रों पर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कुछ जगहों पर वोटिंग मशीनें बंद हो चुकी थीं, जबकि कई केंद्रों पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम बना रहा। इसके चलते मतगणना में भी देरी हुई। बोल्सोनारो के सहयोगियों ने फैसले पर सवाल उठाए और जस्टिस के पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र किया।

महंगाई और अपराध बने चुनाव के बड़े मुद्दे
इस चुनाव में महंगाई, रोजगार और अपराध जैसे मुद्दों का खास असर देखने को मिला। बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्ती बरतने और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें कम करने का वादा किया था। दूसरी ओर, लूला ने सामाजिक कल्याण योजनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को अपने प्रचार का अहम हिस्सा बनाया। पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने अपने अभियान में बदलाव किया और युवाओं समेत अलग-अलग वर्गों के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा राजनीतिक सफर
लूला और बोल्सोनारो, दोनों का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। लूला भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी जा चुके हैं, लेकिन बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद उनकी सजा को निरस्त कर दिया था। इसके बाद लूला ने राजनीति में वापसी की और बोल्सोनारो के खिलाफ अपनी चुनौती मजबूत की।

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लैटिन अमेरिका की राजनीति पर पड़ेगा असर
लूला की जीत से लैटिन अमेरिका में वामपंथी राजनीति को मजबूती मिलने की उम्मीद है। ब्राजील इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसलिए वहां सत्ता परिवर्तन का असर आर्थिक नीतियों और अमेरिका के साथ संबंधों पर भी पड़ सकता है। लूला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के आलोचक रहे हैं। ऐसे में उनकी सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह ब्राजील के आर्थिक और कूटनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगी। लूला ने मजदूर संगठन से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और बाद में वर्कर्स पार्टी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। वह 2002 और 2006 में राष्ट्रपति चुने गए थे। अब उनकी वापसी को उनके लंबे राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दूसरी ओर, चुनावी नतीजों को लेकर बोल्सोनारो के विरोध ने ब्राजील में राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका भी पैदा कर दी है।

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