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Lula da Silva: अमेरिका-चीन टकराव के बीच क्या होगा ब्राजील के नए राष्ट्रपति लूला का रुख?

Tue, 03 Jan 2023 05:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो

सार

Lula da Silva: विश्लेषकों के मुताबिक लूला 11 वर्ष तक सत्ता से बाहर रहने की अवधि में दुनिया में बड़े बदलाव आ गए है। इस बीच अमेरिका और चीन के बीच होड़ तेज हो चुकी है। उधर यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दुनिया में गोलबंदी और तेज हुई है...
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Lula da Silva - फोटो : Agency
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विस्तार
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लुईज इनेसियो लूला द सिल्वा के ब्राजील का राष्ट्रपति बनने का एशिया पर दूरगामी प्रभाव हो सकता है। 76 वर्षीय लूला को एक जनवरी को ब्राजील के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई। इसके पहले लूला 2003 से 2011 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उस दौर में उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन के मंच ब्रिक्स के गठन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तब लूला ने उभरती अर्थव्यवस्था वाले और गरीब देशों की आवाज के बतौर अपनी पहचान बनाई थी। इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके फिर से राष्ट्रपति बनने का अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर क्या प्रभाव होगा।

विश्लेषकों के मुताबिक लूला 11 वर्ष तक सत्ता से बाहर रहने की अवधि में दुनिया में बड़े बदलाव आ गए है। इस बीच अमेरिका और चीन के बीच होड़ तेज हो चुकी है। उधर यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दुनिया में गोलबंदी और तेज हुई है। इनमें चीन और रूस दोनों ब्रिक्स का हिस्सा हैं। लूला ने शपथ लेने के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि ब्रिक्स को मजबूत करना उनकी खास प्राथमिकता होगी। उनके इस बयान से एशिया में उनकी भूमिका को लेकर कयास तेज हुए हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रही होड़ पर लूला का क्या रुख होगा। जहां जरूरत महसूस हुई है वहां अमेरिका या चीन की आलोचना करने में लूला ने कोई हिचक नहीं दिखाई है। पिछले वर्ष राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने चीन पर आरोप लगाया था कि उसने ब्राजील की अर्थव्यवस्था पर दबदबा कायम कर लिया है। इससे ब्राजील के उद्योगों के लिए मुसीबत खड़ी हुई है। समझा जाता है कि ब्राजील में पैदा हुए औद्योगिक संकट से नाराज मतदाताओं का समर्थन पाने के लिए उन्होंने यह बयान दिया था।

लूला वामपंथी विचारों वाले नेता हैं। अपने इस नजरिए से कई अंतरराष्ट्रीय मसलों पर वे अमेरिका के खिलाफ रुख लेते रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले में उन्होंने अमेरिकी रुख का समर्थन नहीं किया है। वैसे विशेषज्ञों की राय है कि इस बार लूला का ध्यान ब्राजील की जर्जर अर्थव्यवस्था को संभालने पर रहेगा। इस मकसद में उन्हें जिस देश की ज्यादा उपयोगिता दिखेगी, उनकी नीतियां उसकी तरफ झुक सकती हैं।

चीन की फुदान यूनिवर्सिटी स्थित सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन में अनुसंधानकर्ता केरीन कोस्टा वैंक्वेज ने कहा है- ‘ब्राजील को चीन के साथ अपने आर्थिक और व्यापार संबंधों के गुण-दोष के बारे में निर्णय लेने की जरूरत है। जरूरी नहीं है कि वह अपने आर्थिक हितों और अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की कीमत पर चीन के साथ रिश्ता बनाए।’

ब्राजील के अमेरिका के साथ भी मजबूत व्यापार संबंध हैं। समझा जाता है कि इस कारण लूला इन दोनों देशों के बीच किसी एक की तरफ झुकने से बचेंगे। जब वे पिछली बार राष्ट्रपति थे, तब अमेरिका और चीन के बीच दोस्ताना संबंध थे। इसलिए तब दोनों में से किसी एक को चुनने का मुद्दा सामने नहीं था। लेकिन इस बार उनके सामने इस टकराव के बीच अपना रास्ता चुनने की चुनौती है।

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