चीन ने सात साल पहले जिबूति में देश के बाहर अपना पहला सैनिक अड्डा बनाया था। जिबुती हिंद महासगार में उस स्थल पर है, जहां से अदन की खाड़ी और लाल सागर अलग होते हैं। समुद्री परिवहन के लिहाज से इस जगह को बहुत अहम माना जाता है।
पश्चिमी सूत्रों से आई खबरों के मुताबिक चीन ने जिबुती में अपने सैनिक अड्डे को अब काफी विकसित कर लिया है। इसे कई तरह की क्षमताओं से लैस किया गया है। अब इस सैनिक अड्डे पर सैनिकों को तैनाती के लिए भेजने, जहाजों में ईंधन भरने, और नौ सैनिक गतिविधियों को सहायता पहुंचाने जैसी तमाम किस्म की सुविधाएं मौजूद हैं।
जिबुती में जब चीन ने सैनिक अड्डा बनाया था, तब उसने कहा था कि यह कारोबार की सुरक्षा के लिए है। लेकिन अब यह इतना बड़ा अड्डा हो चुका है, जहां से चीनी नौ सेना के जहाजों और पनडुब्बियों को संचालित किया जा सकता है।
अब खबर आई है कि जिबुती की तरह ही चीन ने दक्षिण हिंद महासागर में स्थित द्वीप कोमोरोस से संपर्क बनाया है। संभवतः उसके सामने भी चीन ने बड़े पैमाने पर निवेश की पेशकश की है। कोमोरोस मोजाम्बिक चैनल के पास है। इसकी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक रूप से बहुत अहम समझा जाता है। यह उस जगह पर है, जहां से दुनिया के करीब 30 फीसदी टैंकर गुजरते हैं।
बताया जाता है कि कोमोरोस सरकार ने 2018 में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट में शामिल होने के करार पर दस्तखत किए थे। उसके बाद से दोनों देशों के संबंध गहरे होते चले गए। खबरों के मुताबिक अब कोमोरोस चीन के सैनिक अड्डे की मेजबानी करने को तैयार हो गया है।