लेबनान की संसद ने गुरुवार को देश के सेना कमांडर जोसेफ औन को राष्ट्राध्यक्ष के रूप में चुनने के लिए मतदान किया, जिसके साथ दो साल से अधिक समय से खाली राष्ट्रपति पद भर गया है। यह मतदान युद्धविराम समझौते के कुछ हफ्ते बाद हुआ, जिसने इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच 14 महीने के संघर्ष को रोक दिया।
लेबनान को आखिरकार दो साल के लंबे अंतराल के बाद नया राष्ट्रपति मिल गया है। बता दें कि, लेबनान की संसद ने गुरुवार को देश के सेना कमांडर जोसेफ औन को नया राष्ट्राध्यक्ष चुना है। यह मतदान इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच 14 महीने के संघर्ष के युद्धविराम समझौते के कुछ हफ्ते बाद हुआ है। नए राष्ट्रपति जोसेफ औन, जो पूर्व राष्ट्रपति मिशेल औन से कोई संबंध नहीं रखते हैं, को व्यापक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब के पसंदीदा उम्मीदवार के रूप में देखा गया था। जोसेफ औन लेबनान के राष्ट्रपति पद पर आसीन होने वाले पांचवें पूर्व सेना कमांडर हैं।
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हिजबुल्ला समर्थित उम्मीदवार ने वापस लिया था नाम
वहीं हिजबुल्ला ने पहले एक अन्य उम्मीदवार सुलेमान फ्रांगीह का समर्थन किया था, जो उत्तरी लेबनान में एक छोटी ईसाई पार्टी के नेता हैं, जिनके सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर असद से घनिष्ठ संबंध हैं। हालांकि, बुधवार को फ्रांगीह ने घोषणा की कि उन्होंने दौड़ से नाम वापस ले लिया है और जोसेफ औन का समर्थन किया है, जिससे सेना प्रमुख के लिए रास्ता साफ हो गया। वाशिंगटन, डीसी में मौजूद मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक वरिष्ठ फेलो रैंडा स्लिम ने कहा कि इस्राइल के साथ युद्ध और सीरिया में अपने सहयोगी असद के पतन के बाद हिजबुल्ला की सैन्य और राजनीतिक कमजोरी, साथ ही राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव ने गुरुवार को वोट करने के लिए रास्ता साफ किया।
मतदान में जोसेफ औन को मिले इतने मत
गुरुवार को मतदान के पहले दौर में, जोसेफ औन को 128 में से 71 वोट मिले, लेकिन सीधे जीतने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से कम रहे। बाकी में से, 37 सांसदों ने खाली मतपत्र डाले और 14 ने 'संप्रभुता और संविधान' के लिए मतदान किया। दूसरे दौर में, उन्हें 99 वोट मिले। संकटग्रस्त भूमध्यसागरीय छोटे से देश में कई बार राष्ट्रपति पद खाली रही है, जिसमें सबसे लंबा कार्यकाल मई 2014 से अक्तूबर 2016 के बीच करीब ढाई साल का रहा। यह तब खत्म हुआ जब पूर्व राष्ट्रपति मिशेल औन चुने गए।