अमेरिका में लेबनान और इस्राइल के बीच प्रस्तावित प्रत्यक्ष वार्ता से पहले हिजबुल्ला ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन के वरिष्ठ नेता वफीक सफा ने साफ कहा है कि इन वार्ताओं से जो भी समझौता होगा, वह हिजबुल्ला पर लागू नहीं होगा और संगठन खुद को उससे बाध्य नहीं मानता।
वॉशिंगटन में होने वाली इस बैठक में दोनों देशों के राजदूत हिस्सा लेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी इसमें शामिल होंगे। इन वार्ताओं का उद्देश्य इस्राइल-हिजबुल्ला संघर्ष के बीच संभावित युद्धविराम का रास्ता तलाशना है।
हालांकि, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका लक्ष्य हिजबुल्ला का निरस्त्रीकरण है और किसी स्थायी शांति समझौते की दिशा में बढ़ना है। वहीं हिजबुल्ला इस पूरी प्रक्रिया का विरोध कर रहा है।
इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच हालिया संघर्ष में लेबनान को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं, बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। इस्राइल ने हाल ही में बेरूत सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जबकि हिजबुल्ला ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइलें दागीं।
इस्राइल का दावा है कि हालिया हमलों में 250 से ज्यादा हिजबुल्ला लड़ाके मारे गए, लेकिन सफा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि बेरूत में मारे गए सभी लोग आम नागरिक थे।
इस बीच हिजबुल्ला और लेबनान सरकार के बीच भी रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं। सरकार ने संगठन के सशस्त्र विंग को अवैध घोषित कर दिया है और देश में गैर-सरकारी हथियारों को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की है।