लेबनान की सियासी व्यवस्था
- फोटो : AMAR UJALA
पश्चिम एशिया में इस वक्त तनाव फैला हुआ है। गुरुवार तड़के लेबनान की राजधानी बेरूत में एक बार फिर हमला हुआ। इस्राइल के हवाई हमले में कम से कम छह लोग मारे गए। पिछले दिनों इस संघर्ष में एक बड़ी घटना घटी जब इस्राइल ने एक हवाई हमले में हिजबुल्ला के मुखिया हसन नसरल्ला को मार गिराया।
इस्राइल का क्षेत्र के तमाम सशस्त्र समूहों से संघर्ष चल रहा है। इस्राइल और लेबनानी सशस्त्र गुट हिजबुल्ला पिछले करीब एक साल से लड़ रहे हैं। पिछले साल 7 अक्तूबर को इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से ही लेबनान में मौजूद हिजबुल्ला ने सीमा पर इस्राइली सैन्य चौकियों पर हमला करना शुरू कर दिया। तब से इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच गोलीबारी जारी है। इस तरह से गाजा के साथ ही लेबनान भी एक साल से युद्ध का अखाड़ा बना हुआ है।
इस संघर्ष के बीच जानते हैं कि लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था कैसी है? देश को कौन चलाता है? यहां की राजनीतिक व्यवस्था कैसी है? लेबनान में चुनाव कैसे होते हैं? यहां की राजनीति में हिजबुल्ला का कितना दखल है?
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
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लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था कैसी है?
फ्रांस की कॉलोनी रहा लेबनान 1943 में फ्रांस से स्वतंत्र हुआ। देश की आजादी के बाद सत्ता पर भागीदारी के लिए एक धर्म आधारित समझौता हुआ जिससे देश की राजनीति व्यवस्था चलाने का सपना देखा गया। यह व्यवस्था देश के सभी 18 धार्मिक समूहों को सरकार, सेना और सिविल सेवा में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की गारंटी देती है। संसद में सीटों की संख्या ईसाइयों और मुसलमानों के बीच बंटी है। वहीं प्रत्येक धर्म के भीतर विभिन्न समूहों के बीच आनुपातिक रूप से सीटें बांटी जाती है। इसके अलावा सरकारी पद और सार्वजनिक क्षेत्र के पद भी बहुसंख्यक संप्रदायों के बीच बांटे जाते हैं।
इसी व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संसद स्पीकर के तीन प्रमुख सरकारी पदों को क्रमशः एक मैरोनाइट ईसाई, एक सुन्नी मुस्लिम और एक शिया मुस्लिम के बीच बांटी जाती है।
पहली नजर में इसे सरकार में समानता सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन यह प्रणाली बाद में देश की लंबी अस्थिरता का कारण भी बनी। 1975-1990 का गृहयुद्ध, 1982 में इस्राइल से लड़ाई, 1976-2005 के दौरान देश के कुछ हिस्सों पर सीरियाई कब्जा, 2006 में इस्राइल के साथ एक और युद्ध और 2019 में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद भी लगभग यह व्यवस्था नहीं बदली।
हिजबुल्ला की कहानी
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लेबनानी राजनीति पर धर्म का कितना प्रभाव है?
लेबनान की राजनीति में धर्म की अहम भूमिका है। संविधान धार्मिक संप्रदाय के आधार पर सरकार में हिस्सेदारी की गारंटी देता है। सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों की पहचान भी धार्मिक संबद्धता के आधार पर होती है। सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों में धार्मिक जुड़ाव की भूमिका लेबनान से आगे तक फैली हुई है। हिजबुल्ला को इराक और विशेष रूप से ईरान में शिया मुस्लिम सहयोगियों का समर्थन प्राप्त है। वहीं दूसरी ओर फ्यूचर मूवमेंट को सऊदी अरब की सुन्नी मुस्लिम सत्ता का समर्थन हासिल है।
लेबनान की राजनीति का एक खास पहलू यह है कि धार्मिक विभाजन के बावजूद औपचारिक और अनौपचारिक गठबंधन अक्सर मौजूद रहते हैं। पहला प्रमुख गठबंधन 'मार्च 8' है जिसकी दो प्रमुख पार्टियां शिया मुस्लिम (हिजबुल्ला) और ईसाई (फ्री पैट्रियटिक मूवमेंट) हैं जो सीरिया समर्थक एजेंडे से एकजुट हैं। इनका विरोधी समूह मार्च 14 है जो सुन्नी मुस्लिम और मैरोनाइट ईसाई पार्टियों के वर्चस्व वाला एक सीरिया विरोधी गठबंधन है।
लेबनानी गृहयुद्ध को समाप्त करने 1989 में ताइफ समझौता हुआ था जिसने धार्मिक रूप से शक्ति विभाजन को एक नए उच्च सदन तक सीमित करके और संसद में इसे समाप्त करने की योजना बनाई। लेकिन ये परिवर्तन कभी लागू नहीं किए गए।
अभी लेबनान में कौन क्या है?
देश के मौजूदा राष्ट्रपति मिशेल औन हैं। राष्ट्रपति के पास संसद द्वारा पारित कानूनों को लागू करने का अधिकार होता है। मिशेल औन अक्तूबर 2016 में संसद के लिए चुने गए थे। वह मैरोनाइट क्रिश्चियन राजनीतिक पार्टी, फ्री पैट्रियटिक मूवमेंट (एफपीएम) के संस्थापक हैं।
वर्तमान प्रधानमंत्री साद हरीरी हैं। पेशे से व्यवसायी और सुन्नी मुस्लिम नेता हरीरी 2016 से इस पद पर हैं। 2005 में अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या के बाद वह राजनीति में आए थे। वित्तीय मामलों में संसद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसकी जिम्मेदारियों में बजट पारित करना भी शामिल है।
इस्राइल ने एक-एक कर हिजबुल्ला कमांडरों को ढेर किया
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लेबनान की राजनीति में हिजबुल्ला की क्या भूमिका है?
हिजबुल्ला लेबनान में मौजूद एक शिया मुस्लिम सशस्त्र समूह के साथ-साथ यहां की संसद में एक राजनीतिक दल है। हिजबुल्ला 1992 से लेबनानी सरकार का हिस्सा रहा है। इस चुनाव में इसके आठ सदस्य संसद के लिए चुने गए थे। हिजबुल्ला की राजनीतिक शाखा ने 2005 से कैबिनेट पदों पर कब्जा किया है। हिजबुल्ला ने 2009 में एक अपडेटेड घोषणापत्र के साथ मुख्यधारा की राजनीति में आने की बात कही। सबसे हालिया राष्ट्रीय चुनाव 2022 में हुआ था जिसमें पार्टी और उसके सहयोगियों ने अपना बहुमत खो दिया था। हिजबुल्ला ने लेबनान की 128 सदस्यीय संसद में 13 सीटें जीती थीं।
हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्ला मारा गया
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अभी कितना ताकतवर है हिजबुल्ला?
हिजबुल्ला का गठन 1980 के दशक में लेबनान के लंबे गृहयुद्ध के दौरान हुआ था। कहा जाता है कि इसे ईरान की मदद से दक्षिणी लेबनान पर इस्राइल के कब्जे से लड़ने के लिए बनाया गया था। हिजबुल्ला लेबनान में एक शक्तिशाली राजनीतिक और लड़ाकू शक्ति के रूप में उभरा है। इसके साथ ही समूह ने सीरिया, इराक, यमन और पश्चिम एशिया में अन्य जगहों पर अपने गुट का विस्तार किया है। लेबनान में इसके पास अपने समूह को ताकतवर बनाने के लिए एक व्यापक बुनियादी ढांचा है। इसमें सामाजिक सेवाओं, संचार और आंतरिक सुरक्षा के लिए बनाए गए दफ्तर शामिल हैं। हिजबुल्ला का लेबनान के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण है, जिसमें उत्तरी इस्राइल की सीमा पर मौजूद दक्षिणी लेबनान भी शामिल है। हिजबुल्ला का सीरिया के साथ सीमा पर भी वास्तविक नियंत्रण है। संगठन पर आरोप लगते हैं कि वह बेरूत बंदरगाह का इस्तेमाल लेबनान के अंदर और बाहर ड्रग्स, हथियार और विस्फोटक सामग्री के परिवहन के लिए करता है, जिसमें सरकार की कोई निगरानी या हस्तक्षेप नहीं होता है।