क्लाउडिया शीनबाम, मार्क कार्नी
- फोटो : एक्स/मार्क कार्नी
स्थिर विकल्पों की तलाश में कनाडा-मैक्सिको
यह एफटीए तीनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा है। इससे तीनों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। कनाडा का 75 फीसदी से अधिक निर्यात और मैक्सिको का 80 फीसदी से अधिक निर्यात अमेरिका को ही जाता है। ट्रंप की लगातार बदलती व्यापार नीति और टैरिफ की धमकियों ने इन देशों के नेताओं और व्यापार जगत चिंतित कर दिया है, जिससे वे अब व्यापार के लिए अधिक स्थिर विकल्पों की तलाश में है।
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द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना भी कार्नी के दौरे का मकसद
कार्नी के दौरे का मकसद मैक्सिको के साथ संबंध बेहतर करना भी था। दरअसल, कनाडा के कुछ प्रांती नेताओं ने पिछले साल कहा था कि अगर अमेरिका से नया व्यापार समझौता होता है, तो उसमें मैक्सिको को शामिल न किया जाए। ट्रंप ने फेंटानिल की तस्करी के मुद्दे पर कनाडा को मैक्सिको के साथ जोड़ा था और दोनों देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उस समय ओंटारियों प्रांत के प्रमुख नेता डग फोर्ट ने कहा था कि ट्रंप द्वारा कनाडा की तुलना मैक्सिको से करना सबसे अपमानजनक बात है। शीनबाम के राष्ट्रपति पद की शपथ समारोह में कनाडा का प्रतिनिधित्व करने वाले कनाडा के सांसद पीटर बोहम ने कहा कि इन प्रांतीय नेताओं की टिप्पणियों से मैक्सिको नाराज हो गया था। उन्होंने कहा कि मैक्सिको के लोग इस तरह के मामलों के लेकर खासे संवेदनशील हैं और इसमें कोई शक नहीं कि वे इसको लेकर चिंतित थे।