कभी पंजाब और उत्तर भारत तक सीमित माना जाने वाला लॉरेंस बिश्नोई गैंग अब कई देशों के लिए भी मुसीबत बन गया है। अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी इस गैंग से निपटने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। अमेरिका में दाखिल एक संघीय आरोपपत्र और हाल में अमेरिका, कनाडा तथा यूरोप में हुई कार्रवाई ने ये तो साफ कर दिया है कि यह नेटवर्क अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा।
अमेरिकी दस्तावेज का सबसे बड़ा दावा यही है कि जेल में बंद होने के बावजूद लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क लगातार सक्रिय रहा। अभियोजकों के अनुसार, गैंग के अलग-अलग देशों में मौजूद सदस्य सीधे लॉरेंस से संपर्क में रहते थे। निर्देश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर वारदातों को अंजाम दिया जाता था। इसके लिए इंटरनेट कॉलिंग, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप और दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, लॉरेंस-गोल्डी गैंग ने विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को भी निशाना बनाया। आरोप है कि जहां-जहां गैंग सक्रिय था, वहां हिंसक वारदातों और धमकियों के जरिए ऐसा माहौल बनाया गया कि लोग डरकर रंगदारी देने को मजबूर हो जाएं। अमेरिकी दस्तावेज में कहा गया है कि गैंग की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक दावों के जरिए अपनी हिंसक छवि को लगातार मजबूत किया जाता था।
अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि गैंग व्हाट्सऐप और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों और उनके परिवारों को धमकियां देता था। अमेरिका के लॉस एंजिलिस और थाउजेंड ओक्स में भी करोड़ों रुपये के बराबर रंगदारी मांगने के आरोप लगाए गए हैं। यही वजह है कि अब इस नेटवर्क को केवल भारत की कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला माना जा रहा है।
अमेरिकी आरोपपत्र में सबसे गंभीर आरोपों में से एक कनाडा में हुई एक हत्या से जुड़ा है। दस्तावेज में पंजाब के एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता का नाम केवल एचएसएन के रूप में दर्ज किया गया। आरोप है कि इस हत्या का आदेश लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने दिया था।
आरोपपत्र के अनुसार, 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में एक सिख गुरुद्वारे से बाहर निकलते समय दो हमलावरों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। यह मामला लंबे समय तक भारत और कनाडा के बीच भी चर्चा का विषय बना रहा। अमेरिकी दस्तावेज में इस घटना को गैंग की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के उदाहरण के तौर पर शामिल किया गया है। हालांकि इस मामले में अंतिम फैसला अदालत को करना है।
अमेरिकी आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि गैंग केवल राजनीतिक या धार्मिक हस्तियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चर्चित लोगों को भी निशाना बनाकर डर का माहौल बनाने की कोशिश करता था। दस्तावेज के मुताबिक, नवंबर 2023 में कनाडा के वैंकूवर में एक प्रमुख भारतीय अभिनेता और गायक के घर पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी भी लॉरेंस बिश्नोई ने कथित तौर पर ली थी।
आरोप है कि इसके बाद पंजाबी भाषा में फेसबुक पोस्ट जारी कर धमकी दी गई कि हमसे तुम्हें कोई नहीं बचा सकता। अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि इस तरह के दावे और धमकियां गैंग की रंगदारी वसूली की रणनीति का हिस्सा थीं।
अमेरिकी चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि गैंग अपने आपराधिक नेटवर्क को चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी से पैसा जुटाता था। दस्तावेज के मुताबिक, नवंबर 2024 में अमेरिका के रेडलैंड्स में 49 किलोग्राम कोकीन की एक खेप पकड़ी गई थी। आरोप है कि इस खेप की निगरानी लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ कर रहे थे।
जांच के अनुसार, इस कोकीन को ट्रकों के जरिए अमेरिका से कनाडा भेजने की योजना थी। आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच लॉरेंस गैंग ने लॉस एंजिलिस क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी ड्रग तस्कर गिरोहों से करीब 520 किलोग्राम कोकीन की खेप भी अपने कब्जे में ली। अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, ड्रग्स तस्करी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल गैंग की दूसरी आपराधिक गतिविधियों में किया जाता था।
हाल के वर्षों में भारत में कई चर्चित आपराधिक मामलों की जांच के दौरान लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का नाम सामने आया। इनमें सबसे चर्चित मामला पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का रहा। इसके अलावा कई कारोबारियों से रंगदारी मांगने, गैंगवार, हथियारों की तस्करी और हत्या की साजिश जैसे मामलों में भी जांच एजेंसियों ने गैंग के सदस्यों पर कार्रवाई की।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी गैंग के नेटवर्क और उसके विदेशी कनेक्शन की जांच करते हुए कई बार छापेमारी और चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसियों का आरोप है कि गैंग विदेश में बैठे सहयोगियों और भारत में मौजूद शूटरों के जरिए वारदातों को अंजाम दिलाने की कोशिश करता रहा।
लॉरेंस-गोल्डी गैंग का नाम केवल गैंगवार और रंगदारी तक सीमित नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को धमकियां मिलने के मामलों में भी इस गैंग की चर्चा हुई। सबसे अधिक सुर्खियों में अभिनेता सलमान खान को मिली धमकियां और उनके मुंबई स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना रही।
जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और जांच के दौरान गैंग के नेटवर्क की पड़ताल की। इसके अलावा कुछ अन्य कलाकारों और कारोबारियों को भी धमकी भरे संदेश मिलने की घटनाएं सामने आईं। एजेंसियों का मानना है कि चर्चित हस्तियों को निशाना बनाकर गैंग अपनी दहशत बढ़ाना चाहता था, ताकि रंगदारी वसूलना आसान हो सके।
लॉरेंस बिश्नोई का नाम सबसे पहले पंजाब में छात्र राजनीति के दौरान चर्चा में आया। पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ाई के समय वह छात्र संगठन से जुड़ा और यहीं से उसकी पहचान बनी। इसके बाद उस पर हत्या के प्रयास, रंगदारी और गैंगवार जैसे मामलों में आरोप लगने लगे।
धीरे-धीरे उसने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ में सक्रिय कई छोटे अपराधी गिरोहों को अपने साथ जोड़ लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल जाने के बाद भी उसकी गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि उसने जेल के भीतर से ही अपने नेटवर्क को संचालित किया और विदेशों में बैठे सहयोगियों के जरिए गैंग का विस्तार करता रहा। इसी दौरान गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और अन्य सहयोगियों ने विदेशों में नेटवर्क मजबूत किया।
अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई ने अपनी सार्वजनिक छवि बनाने के लिए सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर खुद को राष्ट्रवादी और धार्मिक सोच वाला व्यक्ति बताकर समर्थकों का दायरा बढ़ाया गया।
वहीं, गैंग के संचालन के लिए वीओआईपी (इंटरनेट आधारित कॉलिंग), व्हाट्सऐप और दूसरे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि जेल के भीतर तस्करी कर पहुंचाए गए मोबाइल फोन के जरिए लॉरेंस अपने सहयोगियों को निर्देश देता था। वारदात के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट और धमकी भरे संदेश जारी कर लोगों में डर का माहौल बनाया जाता था। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि यह गैंग की रंगदारी और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का अहम हिस्सा था।
अमेरिकी आरोपपत्र में कहा गया है कि सितंबर 2025 में कनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई के कथित आपराधिक नेटवर्क को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया। इसके बाद कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों की जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई तेज हुई।
अमेरिकी दस्तावेज में इस बात का भी उल्लेख है कि गैंग पर कनाडा में हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में जांच चल रही है। इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नतीजा है कि हाल में अमेरिका, कनाडा और यूरोप में एक साथ कार्रवाई कर कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।
अमेरिका, कनाडा और यूरोप में हुई संयुक्त कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नए खुलासे होने की संभावना है। साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की कोशिशें भी तेज हो सकती हैं।