दुनिया पर एक बार फिर कोरोना का खतरा मंडराने लगा है। पिछले कुछ दिनों से भारत सहित कई देशों में लगातार मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बीच आइए जानते हैं कि किस डब्ल्यूएचओ की टीम ने चीन पहुंचकर वायरस को लेकर पड़ताल की। हालांकि, इसकी रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई।
- 31 दिसंबर 2019- चीन स्थित डब्ल्यूएचओ के कार्यालय को वुहान स्वास्थ्य अधिकारियों की तरफ से वायरल निमोनिया की जानकारी मिली।
- जुलाई 2019 - डब्ल्यूएचओ को पता लगा कि वायरस वुहान के सीफूड मार्केट से पैदा हुआ है।
- 16 अक्टूबर 2019 - पहली बार विदेशी विशषज्ञों और चीनी अधिकारियों के बीच ऑनलाइन मीटिंग हुई।
- 1 जनवरी 2020-वुहान के हुआन मार्केट को अधिकारियों ने बंद किया।
- 12 जनवरी 2020- डब्ल्यूएचओ को चीन ने जानकारी दी कि वुहान के सीफूड मार्केट में वायरस मिला है।
- 28 जनवरी 2020- डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञों ने क्वारंटीन पूरा किया और जांच में जुटे।
- 12 फरवरी 2020 - लांसेट की स्टडी में साफ हुआ कि वायरस का पहला केस इंसान में 1 दिसंबर 2019 को आया और इसका हुआन मार्केट से कोई संबंध नहीं था।
- 6 जनवरी 2021- 10 डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ चीन बॉर्डर पर पहुंचे लेकिन उन्हें आगे जाने नहीं दिया गया।
- 14 जनवरी 2021- डब्ल्यूएचओ ने घोषणा की कि एक टीम चीन जाएगी और मामले की छानबीन करेगी।
- 3 फरवरी 2021- डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ वुहान के वायरस लैब पहुंचे और जांच शुरू की।
- 9 फरवरी 2021 जांच हुई लेकिन वायरस की उत्पत्ति को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई।
विशेषज्ञों का दावा
हालांकि, कोरोना वायरस सबसे पहले कहां से आया, इस बात का पता लगाने के लिए चीन के दौरे से जांच कर लौटे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के चार वैज्ञानिकों ने कुछ दिन पहले बड़ी बात कही थी। उनका कहना था कि वर्तमान में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिनसे यह साबित होता है कि कोरोना वायरस वुहान की लैब से फैला था। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई कि महामारी के उत्पन्न होने और कोरोना वायरस फैलने की सबसे बड़ी वजह वन्य जीवों का व्यापार है।
चैथम हाउस थिंक-टैंक के एक वर्चुअल इवेंट में विशेषज्ञों ने कहा कि उन्हें वुहान के मीट बाजार और दक्षिण चीन के पड़ोसी क्षेत्र के बीच एक लिंक मिला। पहली बार लोग इसी मीट बाजार से वायरस की चपेट में आए थे जबकि दक्षिण चीन के पड़ोसी क्षेत्र में वायरस से संक्रमित चमगादड़ पाए गए थे।
यूरोप में बरपाया कहर
लाखों लोग अब तक कोरोना वायरस से जान गंवा चुके हैं। तमाम संसाधनों के बावजूद यूरोप कमजोर पड़ गया और इस वायरस ने यहां भारी तबाही मचाई है। सबसे अधिक मौतें ब्रिटेन में हुई हैं। जानते हैं यूरोप के किस देश में कितने लोगों ने जान गंवाई।
- ब्रिटेन- 125,580
- इटली - 102,499
- रूस - 92,937
- फ्रांस - 90,788
- जर्मनी - 73,656
- स्पेन - 72,424
- पोलैंड- 47,578
- तुर्की - 29,552
- यूक्रेन - 29,679