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वेनेजुएला: बड़े राजनीतिक संकट में फंसा एक अमीर देश, 34 दिनों से ब्लैकआउट, लोग बेहाल

Shilpa Thakur
Updated Thu, 11 Apr 2019 01:42 PM IST
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वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media

दुनियाभर में एक अमीर लैटिन अमेरिकी देश के रूप में पहचान बनाने वाला वेनेजुएला आज एक बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। यहां सामान इतना महंगा हो चुका है कि लोग भूखे रहने पर मजबूर हैं। यहां की महिलाएं, जो कभी अध्यापक और नर्स हुआ करती थीं, आज देह व्यापार के काम में उतरने को मजबूर हैं। देश के अस्पतालों का हाल किसी डरावने सपने से कम नहीं है। तेल की मौजूदगी के बावजूद भी यहां बिजली, पानी नहीं है। 

क्या है कारण?

वेनेजुएला की इस हालत का जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि यहां के राजनेता हैं। वर्तमान में यहां निकोलस मादुरो की सरकार है। वह साल 2013 से देश के राष्ट्रपति का पद संभाल रहे हैं। बीते साल यहां राष्ट्रपति चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भी निकोलस मादुरो ने जीत हासिल की। वह दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने। 

लेकिन मादुरो के चुनाव जीतने के बाद विपक्षी पार्टी के नेता जुआन गुइगो ने उनपर चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। गुइदो ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया। गुइदो ने राजधानी कराकास में जब पहली रैली की थी, तो उसमें देशभर से 2.5 लाख लोग शामिल हुए थे। 



वहीं अमेरिका ने भी इस काम में गुइदो का साथ दिया। अमेरिका ने कहा कि 'पूर्व राष्ट्रपति मादुरो' के पास अब कोई अधिकार नहीं है। अमेरिका ने सेना से भी अपील करते हुए कहा कि गुइदो का ही समर्थन करें। 11 महीनों से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है। सरकार ने गुइदो पर 15 साल का प्रतिबंध लगाया है। संविधान सभा में भी गुइदो के खिलाफ वोटिंग हुई है। 

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वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media
दुनियाभर में एक अमीर लैटिन अमेरिकी देश के रूप में पहचान बनाने वाला वेनेजुएला आज एक बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। यहां सामान इतना महंगा हो चुका है कि लोग भूखे रहने पर मजबूर हैं। यहां की महिलाएं, जो कभी अध्यापक और नर्स हुआ करती थीं, आज देह व्यापार के काम में उतरने को मजबूर हैं। देश के अस्पतालों का हाल किसी डरावने सपने से कम नहीं है। तेल की मौजूदगी के बावजूद भी यहां बिजली, पानी नहीं है। 

क्या है कारण?

वेनेजुएला की इस हालत का जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि यहां के राजनेता हैं। वर्तमान में यहां निकोलस मादुरो की सरकार है। वह साल 2013 से देश के राष्ट्रपति का पद संभाल रहे हैं। बीते साल यहां राष्ट्रपति चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भी निकोलस मादुरो ने जीत हासिल की। वह दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने। 

लेकिन मादुरो के चुनाव जीतने के बाद विपक्षी पार्टी के नेता जुआन गुइगो ने उनपर चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। गुइदो ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया। गुइदो ने राजधानी कराकास में जब पहली रैली की थी, तो उसमें देशभर से 2.5 लाख लोग शामिल हुए थे। 

वहीं अमेरिका ने भी इस काम में गुइदो का साथ दिया। अमेरिका ने कहा कि 'पूर्व राष्ट्रपति मादुरो' के पास अब कोई अधिकार नहीं है। अमेरिका ने सेना से भी अपील करते हुए कहा कि गुइदो का ही समर्थन करें। 11 महीनों से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है। सरकार ने गुइदो पर 15 साल का प्रतिबंध लगाया है। संविधान सभा में भी गुइदो के खिलाफ वोटिंग हुई है। 

वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media

लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

इस राजनीतिक संकट से यहां के लोग बेहद खराब स्थिति में जीने को मजबूर हैं। यहां 3.2 करोड़ की आबादी बिना बिजली, पानी के रहने को मजबूर है। जिससे यहां खाने का भारी संकट है। बीते 34 दिनों में पांच बार ब्लैकआउट हो चुका है। यहां बिजली ना होने के कारण पानी के पंप ठप पड़े हैं। 

सामान का दाम इतना अधिक हो गया है कि लोग पानी तक नहीं खरीद पा रहे। यहां पांच लीटर पानी 140 रुपये में मिल रहा है। कार्ड पेमेंट करने वाली मशीनों ने काम करना बंद कर दिया है। यहां दूध का दाम पांच हजार रुपये लीटर पहुंच गया है। हालांकि कुछ समय पहले तक यहां पेट्रोल लगभग मुफ्त था, एक लीटर पेट्रोल करीब 70 पैसे में मिल रहा था। लेकिन अब पेट्रोल का दाम अचानक एक डॉलर तक पहुंच गया है।

क्या है अस्पतालों का हाल?

वेनेजुएला के अस्पतालों का हाल किसी बुरे सपने की तरह हो गया है। जिसे घरों से भी खतरनाक स्थान माना जा रहा है। अस्पतालों में ना तो पानी है और ना बिजली। बिना बिजली के मशीनें भी काम नहीं कर रही हैं। लोगों का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। 

अस्पताल में कई महत्वपूर्ण उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। पूरा देश अंधेरे में डूब चुका है। सही इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की मौत हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक बीते 80 दिनों में भुखमरी और इलाज के अभाव में 45 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां अर्थव्यवस्था को रोज 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। खाने-पीने की चीजों की कमी के कारण 1200 बिजनेस सेंटर लूट लिए गए हैं।

किसे मिल रहा बाकी देशों का समर्थन?

अमेरिका, ब्रिटेन सहित 50 देश विपक्ष के नेता जुआन गुइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दे चुके हैं। जबकि मादुरो को रूस और चीन सहित 10 देशों का समर्थन प्राप्त है। इसके साथ ही देश की सेना भी मादुरो के प्रति वफादार है। ऐसे में ये मादुरो सरकार की कमी ही मानी जाएगी, कि विपक्ष इतना हावी हो रहा है। वहीं विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप के कारण वेनेजुएला में सुधार के आसार भी कम नजर आ रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram

क्या है अमेरिका का उद्देश्य?

अमेरिका की ट्रंप सरकार लोकतांत्रिक रूप से वेनेजुएला में मादुरो सरकार का तख्ता पलटने पर अमादा है। ऐसा इसलिए क्योंकि करीब एक सदी तक वेनेजुएला में अमेरिका का अच्छा खासा प्रभाव रहा है। यहां तेल की बड़ी कंपनी और कारोबारी अमेरिकी नियंत्रण वाले हैं। यहां बीते कुछ सालों में वामपंथी और समाजवादी झुकाव वाली सरकारें आई हैं। इस सरकार के आने से अमेरिका का प्रभाव वेनेजुएला पर कम होता जा रहा है। अमेरिका इसे बर्दाश नहीं कर पा रहा है।

वेनेजुएला की राजनीति में सबसे ज्यादा हस्तक्षेप अमेरिका ही कर रहा है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि मादुरो की सरकार को संयुक्त राष्ट्र की ओर से जो विशेषाधिकार दिए गए हैं, वो वापस ले लिए जाएं। साथ ही विपक्ष के नेता जुआन गुइदो को वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति घोषित किया जाए।
 
ये सब अमेरिका अपने लाभ के लिए कर रहा है। वेनेजुएला की 96 फीसदी आय कच्चे तेल पर ही निर्भर करती है। इस देश को बड़ी मात्रा में जरूरत की ज्यादातर चीजों का आयात करना पड़ता है। फिलहाल वह अमेरिकी पाबंदी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल भी नहीं बेच पा रहा है।

महिलाओं की स्थिति?

दुनिया को सबसे ज्यादा मिस वर्ल्ड देने वाले इस देश की महिलाओं की स्थिति सबसे खराब है। देश में चल रहे संकट के कारण बड़ी संख्या में लोग पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं। जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। आर्थिक संकट की वजह से यहां की महिलाओं को देह बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

इन महिलाओं ने कई अंतराराष्ट्रीय मीडिया को दिए साक्षात्कार में अपना दर्द बयां किया है। जो महिलाएं वेनेजुएला में कभी नर्स, डॉक्टर, अध्यापक हुआ करती थीं, वो पड़ोसी देशों में देह व्यापार का काम कर रही हैं। कोलंबिया में काम की तलाश में आई एक नर्स का तो ये भी कहना है कि उसे वहां सफाई करने की नौकरी तक नहीं मिली। लेकिन अपने परिवार का पेट भरने के लिए वो यहां देह व्यापार का काम करने को मजबूर है।

वेनेजुएला में संकट - फोटो : social media

क्या सुधार हो रहा है?

अमेरिका सहित कई देशों ने वेनेजुएला की मदद करने का फैसला लिया है। नौ लैटिन अमेरिकी देशों के प्रतिनिधियों ने इक्वाडोर की राजधानी क्विटो में वेनेजुएला को फंड देने के लिए एक बैठक भी की। इस बैठक में फंड जुटाने के प्रस्ताव पर दस्तखत किए गए। ताकि वेनेजुएला से लोगों का पलायन रोका जा सके। इसके अलावा अमेरिकी सरकार ने भी वेनेजुएला को मानवीय सहायता के तौर पर 6 करोड़ डॉलर की मदद देने को कहा है।

तेल में अमीर, फिर क्यों गरीब?

कच्चे तेल को काला सोना कहा जाता है। जिसपर दुनियाभर के देशों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि कई देशों के राजस्व में एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल की बिक्री से होने वाली आय का है। ऐसे में ये मान लेना स्वाभाविक है कि जिन देशों के पास कच्चे तेल का बड़ा जखीरा है वो फायदे में होंगे।

वेनेजुएला के पास कच्चे तेल का सबसे बड़ा भंडार है। अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के अनुसार इस देश में 30,230 करोड़ बैरल कच्चा तेल है। ऐसे में कच्चे तेल वाला देश कभी संकट का सामना नहीं करेगा, ये पूरी तरह सच नहीं है। क्योंकि कच्चा तेल हमेशा देश के लिए अधिक नकदी ले कर नहीं आता। 
 
आपके लिए- वेनेजुएला एक अमीर लैटिन अमेरिकी देश है। कुछ समय पहले तक देश में कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन निकोलस मादुरे के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से देश में राजनीतिक संकट है। विपक्षी नेता जुआन गुइदो ने उनपर चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। लोगों को खाना, पानी, बिजली और अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप के कारण हालात और भी खराब होते जा रहे हैं।

 
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