ब्रिटेन में किंग चार्ल्स का शनिवार को राज्याभिषेक होगा। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद ही चार्ल्स को सम्राट का दर्जा मिल गया था, लेकिन अब उन्हें वास्तव में ताज पहनाने की शाही परंपरा अपनाई जाएगी। महारानी एलिजाबेथ का राज्याभिषेक 2 जून 1953 को हुआ था। करीब सौ देशों के राष्ट्राध्यक्ष और राजपरिवार इस दौरान एक हजार साल पुरानी पंरपरा के साक्षी बनेंगे।
पहली बार...
बौद्ध-हिंदू धर्मगुरु भी होंगे शामिल
ब्रिटिश राजशाही के इतिहास में पहली बार किसी उत्तराधिकारी को राज्याभिषेक के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ा है।
पहला मौका होगा...जब राज्याभिषेक के अनुष्ठान में बौद्ध, हिंदू, यहूदी, मुस्लिम और सिख धर्मगुरु भी शामिल होंगे।
धनखड़ कर रहे भारत का प्रतिनिधित्व
भारत की तरफ से आधिकारिक प्रतिनिधि के तौर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ राज्याभिषेक समारोह में मौजूद रहेंगे। वह पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ सहित शुक्रवार को लंदन पहुंच गए हैं। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि लंदन में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
सजावट भी होगी खास...
राज्याभिषेक के लिए आयोजन स्थल को खास तरह के फूलों से सजाया गया है। इसमें मुख्य रूप से एंकिलेजिया फूल का इस्तेमाल किया गया है, जिसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
नहीं आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति
समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति के शामिल न होने की परंपरा इस बार भी बरकरार रही है। राष्ट्रपति जो बाइडेन समारोह में नहीं आएंगे। हालांकि, उनकी पत्नी जिल बाइडेन मौजूद रहेंगी।
मेगन कैलिफोर्निया में
चार्ल्स के छोटे बेटे प्रिंस हैरी की पत्नी मेगन अपने दोनों बच्चों के साथ दक्षिणी कैलिफोर्निया में हैं और शाही समारोह का हिस्सा नहीं बनेंगी।
पत्नी के साथ आएंगे सुनक
ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ शामिल होंगे। साथ हाउस ऑफ लार्ड्स के सदस्य भी होंगे।
जश्न के बीच शाही फिजूलखर्ची का हो रहा विरोध भी
राज्याभिषेक पर 100 मिलियन पाउंड यानी 1029 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। लगभग पूरे देश में जश्न का माहौल है। पर कुछ लोग आयोजन के खिलाफ भी हैं। दरअसल इसका सारा खर्च राजपरिवार नहीं, बल्कि कर देने वाली जनता के पैसों से हो रहा है। ऐसे में परंपरा के नाम पर इस शाही समारोह पर हो रही फिजूलखर्ची के विरोध में प्रदर्शन भी हो रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसके बाद देश से शाही परिवार जैसा ओहदा खत्म हो जाए। वे राज्याभिषेक के विरोध में ‘नॉट माई किंग’ अभियान चला रहे हैं। ट्विटर पर भी ये ट्रेंड कर रहा है।
सर्वे में दावा- 50% लोग विरोध में
शाही समारोह पर हो रहे खर्च को लेकर कराए गए एक सर्वे के अनुसार देश के 50% लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोग महंगाई से परेशान हैं। लोगों के पास बिजली पानी का बिल भरने के पैसे नहीं हैं। बड़े-बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर खाली पड़े हुए हैं। जनता बेहाल है। ऐसे मौके पर शाही समारोह में इतना खर्च करना करदाताओं पर अत्याचार है।