ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय आज अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में ऐतिहासिक दौरे के तहत अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे। वह अपनी मां रानी एलिजाबेथ द्वितीय के बाद अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले पहले ब्रिटिश किंग बनेंगे। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1991 में कांग्रेस को संबोधित किया था।
चार्ल्स III की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ऐसे समय में अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों को मजबूती देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक मतभेद और आर्थिक तनाव भी सामने आए हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रंप से करेंगे मुलाकात
किंग चार्ल्स अपनी पत्नी क्यून कैमिला के साथ दिन की शुरुआत द व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के साथ करेंगे। व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, वैश्विक हालात और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हो सकती है। शाम को राष्ट्रपति ट्रंप किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगे। ट्रंप पहले भी ब्रिटिश शाही परिवार के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते रहे हैं। ऐसे में इस मुलाकात को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस में ऐतिहासिक संबोधन
किंग चार्ल्स का अमेरिकी कांग्रेस में भाषण इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में संबोधन का मौका केवल चुनिंदा वैश्विक नेताओं को मिलता है। इससे पहले पोप फ्रांसिस, वाक्लाव हावेल और विंस्टन चर्चिल जैसे नेताओं को यह सम्मान मिला है। उम्मीद है कि चार्ल्स अपने भाषण में दोनों देशों के साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, सुरक्षा साझेदारी और वैश्विक चुनौतियों पर जोर देंगे।
अमेरिका-ब्रिटेन रिश्तों में तनाव भी
हालांकि औपचारिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन हाल के महीनों में कुछ मुद्दों पर तनाव भी सामने आया है। राष्ट्रपति ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच रिश्तों में खटास की खबरें रही हैं। ईरान युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की ट्रंप की कोशिशों को स्टार्मर ने पूरी तरह समर्थन नहीं दिया। इसके बाद ट्रंप ने स्टार्मर पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह विंस्टन चर्चिल जैसा नेतृत्व नहीं है।
टैरिफ और व्यापार विवाद
राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन पर टैरिफ लगाए हैं और आगे अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ब्रिटेन अमेरिकी टेक कंपनियों पर लगाया गया डिजिटल सर्विस टैक्स नहीं हटाता, तो बड़ा टैरिफ लगाया जा सकता है। इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर दबाव बना है।
NATO और ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन पर असर
ट्रंप प्रशासन ने पारंपरिक ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन को लेकर भी कई कड़े बयान दिए हैं। NATO से दूरी बनाने की चेतावनी, ग्रीनलैंड को लेकर बयान और कनाडा पर टैरिफ जैसे कदमों ने यूरोपीय सहयोगियों को चिंतित किया है। ब्रिटेन भी इस बदलते समीकरण पर नजर बनाए हुए है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने किंग चार्ल्स से कुछ विवादित मुद्दों पर बोलने की अपील की है। वहीं डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि राजा की यात्रा अमेरिका-ब्रिटेन रिश्तों को सुधारने में मदद कर सकती है।
आगे का कार्यक्रम
चार दिन के अमेरिकी दौरे के दौरान किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला न्यूयॉर्क शहर और वर्जीनिया भी जाएंगे। वहां कई सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राजनयिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।