प्रतिबंधित सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) से जुड़े खालिस्तानी इंद्रजीत सिंह गोसल ने कनाडा में जमानत पर रिहा होते ही भारत के खिलाफ जहर उगला है। उसने भारत को संबोधित करते हुए कहा- भारत, मैं गुरपतवंत सिंह पन्नू का समर्थन करने, 23 नवंबर को खालिस्तान जनमत संग्रह कराने के लिए बाहर आया हूं। वह बोला, दिल्ली बनेगा खालिस्तान।
उसने एक सप्ताह के भीतर ओंटारियो सेंट्रल ईस्ट सुधार केंद्र से जमानत मिलने के बाद रिहा होकर अपना चरमपंथी रुख दिखाया। गोसल की वीडियो फुटेज प्रतिबंधित एसएफजे नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू ने प्रसारित किया था, जिसने उसी वीडियो में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर निशाना साधा था। पन्नू ने कहा, अजीत डोभाल, आप कनाडा, अमेरिका या किसी यूरोपीय देश में आकर मुझे गिरफ्तार करने या प्रत्यर्पण करने की कोशिश क्यों नहीं करते? डोभाल, मैं आपका इंतजार कर रहा हूं। सीबीसी के अनुसार, कनाडाई पुलिस ने पहले गोसल को ओंटारियो में खतरनाक हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसका पुराना रिकॉर्ड भी खतरनाक अपराधी जैसा रहा है।
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पुलिस ने दी है जान के खतरे की चेतावनी
सीबीसी ने बताया कि अलगाववादी खालिस्तानी नेता इंद्रजीत सिंह गोसल ने खुद दावा किया है कि कनाडा में पुलिस ने उसे उसकी जान को खतरा होने की चेतावनी दी थी। अधिकारियों ने पहले पुष्टि की है कि देश में कई सिख कार्यकर्ताओं को ऐसे अलर्ट जारी किए जाते रहे हैं। हालांकि इसके बाद गोसल को गिरफ्तार कर ओंटारियो मध्य-पूर्व सुधार केंद्र भेजा गया। लेकिन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उसे रिहाई मिल गई है। रिहा होते ही उसने भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया।
भारत-कनाडा संबंध बनाने के प्रयासों के बीच धमकी
एसएफजे प्रमुख पन्नू को जुलाई 2020 में भारत के गृह मंत्रालय द्वारा एक नामित व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया था और वह देश में आतंकवाद के आरोपों में कई मामलों का सामना कर रहा है। यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा का नया नेतृत्व भारत के साथ संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है। पिछले हफ्ते, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नई दिल्ली में अपनी कनाडाई समकक्ष नथाली ड्रोइन के साथ विस्तृत बातचीत की, जिसमें महीनों के तनाव के बाद तनाव कम करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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त्रूदो कार्यकाल में गतिरोध
इससे पहले हरदीप सिंह निज्जर की हत्या ने तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो द्वारा भारत की संलिप्तता के बेबुनियाद आरोप लगाने के बाद राजनयिक गतिरोध पैदा हो गया था। इसे नई दिल्ली ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया था और ओटावा पर खालिस्तानी चरमपंथियों को पनाह देने का आरोप लगाया। भारत ने कनाडा से अपने राजनयिकों को भी वापस बुलाने का फैसला किया। लेकिन नए पीएम के आने पर संबंध फिर से बनना शुरू हुए हैं।
निज्जर का करीबी सहयोगी
गोसल को खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर का सहयोगी माना जाता है, जिसकी जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।