बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता खालिदा जिया की सजा को उच्च न्यायालय ने 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। अदालत ने यह फैसला अभियोजन पक्ष की याचिका पर किया। यह फैसला एक दिन बाद आया है, इससे पहले 73 साल की जिया को सोमवार को भ्रष्टाचार के एक दूसरे मामले में अदालत ने 7 साल जेल की सजा सुनाई थी। इसके कारण चुनाव से पहले विपक्ष पर दबाव बढ़ गया है।
बढ़ी हुई सजा खालिदा को अनाथालय में धोखाधड़ी करने के मामले में दी गई है। वह प्रधानमंत्री शेख हसीना की कड़ी प्रतिद्वंदी मानी जाती हैं। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के अभियोक्ता खुर्शीद ए खान ने कहा, 'उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले का समर्थन किया और जेल की सजा को दोगुना कर दिया।' बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएमपी) की कमान जेल के रहने के बावजूद
खालिदा जिया के हाथों में है।
बीएनपी ने घोषणा की है कि वह मंलगवार से फैसले के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल महबूबे आलाम ने कहा कि जब तक उच्चतम न्यायालय जिया की सजा पर रोक नहीं लगा देती वह (जिया) चुनाव नहीं लड़ सकती हैं। बता दें कि पड़ोसी राज्य में दिसंबर में चुनाव होने हैं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थकों ने उनपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
जिया को अपने पति जिया-उर रहमान के अनाथालय जिया चैरिटेबल ट्रस्ट में गबन के आरोप में दोषी पाया गया था। पहले उन्हें अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई थी। फरवरी में जब उन्हें सजा सुनाई गई तो वहां बहुत सी
हिंसक घटनाएं हुई थीं। विपक्षी प्रदर्शनकारी सत्ता पक्ष और पुलिस से भिड़ गए थे। वहीं जिया के बेटे तारिक रहमान को 2004 ग्रेनेड हमले में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।