परिवार का कहना है कि उन्होंने वर्दी उतारने के प्रयासों का विरोध किया था। लेकिन प्रशासन ने उनकी मर्ज़ी और अदालत से कोई आदेश लिए बिना ही शव से वर्दी उतार ली। वहीं इलाक़े के असिस्टेंट चीफ़ डेनियल नामायी ने शव निकाले जाने की आलोचना की है और इसमें शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा, "एक बार अगर शव दफ़ना दिया जाता है तो उसे बाहर निकालने के लिए अदालत से आदेश लेना ज़रूरी होता है। काउंटी प्रशासन ने वर्दी बरामद करने के लिए क़ानून का उल्लंघन किया है।" वहीं अबांगओन्या समुदाय के बुज़ुर्गों ने भी इस क़दम की आलोचना की है। इस समुदाय में शव को क़ब्र से निकाले जाने को अपशकुन भी माना जाता है।
मुटाम्बा ने कहा, "हमने अपने बेटे का शव रात में दफ़न करने का फ़ैसला लिया था क्योंकि डूबकर मरने वालों को सूरज की रोशनी में नहीं दफ़नाया जाता है। लेकिन काउंटी अधिकारी के वर्दी बरामद करने के लिए शव निकालने के फ़ैसले ने हमें चौंका दिया है।"
वहीं स्थानीय अधिकारी रॉबर्ट सुम्बी ने बीबीसी से कहा कि मृतक को दफ़नाने से पहले कुछ देर के लिए ही वर्दी पहनाई गई थी जो बाद में उतार ली गई थी। वगीं काकामेगा के काउंटी चीफ़ का कहना है कि आमतौर पर लोगों को सामान्य पोशाक में ही दफनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्दी परिवार के पास छोड़ दी गई थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन के पास नई वर्दी खरीदने के पैसे थे।