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US: 'छह जनवरी के बाद ट्रंप के खाते बंद किए', जेपीमॉर्गन बैंक का कोर्ट में कबूलनामा; समझें पूरा विवाद

Sun, 22 Feb 2026 08:04 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

Trump Accounts Debanking Case: जेपीमॉर्गन चेज ने अदालत में स्वीकार किया कि 6 जनवरी 2021 के हमले के बाद ट्रंप और उनकी कंपनियों के खाते बंद किए गए थे। ट्रंप ने बैंक और जेमी डाइमोन पर पांच अरब डॉलर का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने राजनीतिक भेदभाव और ब्लैकलिस्ट में डालने का आरोप लगाया है। 
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : PTI
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विस्तार
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छह जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के बैंक खातों को बंद किए जाने का मामला फिर चर्चा में है। जेपीमॉर्गन चेज ने पहली बार अदालत में स्वीकार किया है कि फरवरी 2021 में ट्रंप और उनकी कुछ कंपनियों के खाते बंद किए गए थे। यह स्वीकारोक्ति उस मुकदमे के दौरान सामने आई है जिसमें ट्रंप ने बैंक और उसके प्रमुख जेमी डाइमोन पर 5 अरब डॉलर का दावा ठोका है। ट्रंप का आरोप है कि उनके खाते राजनीतिक कारणों से बंद किए गए, जिससे उनके कारोबार को नुकसान हुआ।
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दायर हलफनामे में बैंक के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डैन विल्कनिंग ने लिखा कि फरवरी 2021 में निजी बैंक और कमर्शियल बैंक से जुड़े कुछ खाते बंद करने की सूचना दी गई थी। अब तक बैंक केवल सामान्य तौर पर खाते बंद करने की नीतियों पर बात करता रहा था, लेकिन यह पहली बार है जब उसने सीधे तौर पर ट्रंप के खातों के बंद होने की पुष्टि की है। बैंक ने पहले कहा था कि यह मुकदमा बेबुनियाद है।

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ट्रंप ने क्या आरोप लगाए
ट्रंप ने यह मुकदमा पहले फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया था, जहां अब उनका मुख्य निवास है। उनका कहना है कि बैंक ने ‘ट्रेड लाइबल’ किया और फ्लोरिडा के अनुचित और भ्रामक व्यापार कानून का उल्लंघन किया। मुकदमे में आरोप है कि जब खाते बंद किए जा रहे थे, तब ट्रंप ने जेमी डाइमोन से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और उन्होंने मामले को देखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ट्रंप के वकीलों ने आरोप लगाया है कि बैंक ने राष्ट्रपति और उनकी कंपनियों को एक  'ब्लैकलिस्ट' में डाल दिया। उनका कहना है कि इस सूची का उपयोग अन्य बैंक भी करते हैं। इससे भविष्य में नए खाते खोलने या सेवाएं लेने में दिक्कत आती है। वकीलों का दावा है कि इससे ट्रंप परिवार और उनके कारोबार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

डीबैंकिंग को लेकर फिर बहस तेज
यह मामला तथाकथित 'डीबैंकिंग' की बहस को फिर से तेज कर रहा है। डीबैंकिंग तब होता है जब बैंक किसी ग्राहक के खाते बंद कर देता है या उसे सेवाएं देने से मना कर देता है। पिछले कुछ वर्षों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कई रूढ़िवादी नेताओं का आरोप रहा है कि 6 जनवरी की घटना के बाद 'जोखिम' के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
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जेपीमॉर्गन अब इस केस को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहा है, जहां खाते संचालित होते थे। यह ट्रंप का किसी बड़े बैंक के खिलाफ पहला मामला नहीं है। मार्च 2025 में ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने क्रेडिट कार्ड कंपनी कैपिटल वन पर भी इसी तरह का मुकदमा दायर किया था, जो अभी लंबित है।

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