चुनावी बहस में हार के कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति जो बाइडन के चुनाव अभियान को एक बड़ा झटका लगा है। उनके वित्तदाताओं के एक समूह ने पहले दिए गए योगदान से लगभग 90 मिलियन अमेरिकी डॉलर को ना देने का फैसला लिया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, "कैश के रुकने से बाइडन के अभियान को झटका लगा है।" डेमोक्रेटिक दानदाताओं ने सबसे बड़े बाइडन समर्थक सुपर पीएसी फ्यूचर फॉरवर्ड को यह बताया है।
बाइडन के समर्थकों की संख्या कम हुई
अमेरिका में इस साल नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। राष्ट्रपति जो बाइडन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर है। वहीं राष्ट्रपति बाइडन के समर्थन में भारतीय-अमेरिकी समर्थकों के प्रतिशत में गिरावट देखने को मिली। हर दो साल होने वाले एशियाई-अमेरिकी वोटर सर्वे (एएवीएस) के अनुसार, 2020 के चुनाव और 2024 में होने वाले चुनाव में जो बाइडन का समर्थन करने वाले भारतीय-अमेरिकी समर्थकों में 19 फीसदी की गिरावट हुई है।
भारतीय-अमेरिकी समर्थन में गिरावट
एशियन एंड पैसिफिक आइलैंडर अमेरिकन वोट (एपीआईएवोट), एएपीआई डेटा, एशियन अमेरिकन्स एडवांसिंग जस्टिस (एएजेसी) और एएआरपी के सर्वे के अनुसार, इस साल 49 फीसदी भारतीय-अमेरिकी नागरिक जो बाइडन के लिए मतदान कर सकते हैं। 2020 में यह आंकड़ा 65 फीसदी था। वहीं सर्वे ने बताया कि 30 फीसदी भारतीय-अमेरिकी नागरिक पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मतदान कर सकते हैं।
बढ़ती उम्र को लेकर उठ रहे हैं सवाल
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में चार महीने का ही समय बाकी है, लेकिन डेमोक्रेट पार्टी अपने उम्मीदवार को लेकर दुविधा में है। दरअसल पार्टी में जो बाइडन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के खिलाफ उठे स्वर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि बाइडन ने साफ किया है कि वही रेस में हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें तो पार्टी के भीतर जो बाइडन के विकल्पों पर विचार शुरू हो गया है। खासकर बीते दिनों अटलांटा में हुई पहली बहस के बाद तो बाइडन की बढ़ती उम्र की चर्चा फिर से तेज हो गई है।