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लंदन में नीलाम हुए पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की पत्नी के बेशकीमती आभूषण

Fri, 30 Oct 2020 09:02 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, लंदन
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की अंतिम पत्नी महारानी जिंदन कौर के बेशकीमती स्वर्ण और रत्न जड़ित आभूषणों की लंदन में नीलामी हुई। ये आभूषण जिंदन कौर की बड़ी पोती प्रिंस बांबा सुथरलैंड के पास थे। महारानी के नीलाम हुए आभूषणों के एक सेट में स्वर्ण और रत्न जड़ित 'चांद टिक्का', मोतियों का हार और अन्य दुर्लभ जेवर शामिल हैं। इनकी 62,500 पाउंड यानी 60 लाख रुपये से ज्यादा में नीलामी हुई। इस सप्ताह लंदन में आयोजित 'बोहमास इस्लामिक एंड इंडियन आर्ट सेल' में इन आभूषणों को खरीदने के लिए कई दावेदार आगे आए। 

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बता दें कि जिंदन कौर महाराजा रणजीत सिंह की एकमात्र जीवित पत्नी थीं। उन्होंने अंग्रेजों के पंजाब पर कब्जे का कड़ा प्रतिकार किया था, लेकिन आखिरकार उन्हें भी आत्मसमर्पण करना पड़ा था। उसके बाद लाहौर स्थित महाराजा के खजाने से 600 से ज्यादा आभूषण जब्त कर लिए गए थे। महारानी को 1848 में नेपाल भागने से पहले कारागार में डाल दिया गया था। बोहमास सेल ने नीलाम की जा रही ज्वेलरी के साथ यह ऐतिहासिक ब्योरा दिया है। नीलामी में 19वीं सदी की कई अन्य बेशकीमती कलाकृतियां व आभूषण आदि भी शामिल हैं। 


नीलामीकर्ता फर्म के प्रमुख ऑलिवर व्हाइट के अनुसार महारानी जिंदन कौर के ये आभूषण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तब वापस लौटा दिए थे, जब उन्होंने अपने बेटे दुलीप सिंह के साथ लंदन में रहना कबूल कर लिया था। दुलीप सिंह, महारानी से 1861 में कलकत्ता में दोबारा मिले थे। हालांकि युवराज दुलीप सिंह संयोग से लाहौर लौट गए थे, लेकिन उनकी बड़ी बेटी बांबा इंग्लैंड में ही रहीं, जहां वह जन्मी व पली-बढ़ीं। बांबा ने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिका के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की थी। 
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लाहौर स्थित अपने पैतृक घर अक्सर जाने वाली बांबा अपने जीवन के अंतिम काल में वहीं जाकर रहीं और ये सारे आभूषण अपनी सहयोगी व मित्र रहीं मिसेस डोरा क्रोव को सौंप दिए थे। महाराजा रणजीत सिंह व दुलीप सिंह का लाहौर स्थित खजाना विश्व के दुर्लभतम खजानों में से एक था। अब महाराजा रणजीत सिंह, महारानी जिंदन कौर, महाराजा दुलीप सिंह, प्रिंसेज बांबा तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन इन जेवरों की नीलामी के बहाने एक बार फिर इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए भारत के स्वर्णिम अध्याय के पन्नों को पलटने का प्रसंग आया है।

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