अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की ओर से वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत से इनकार करने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बातचीत की एक 'फारसी चाल' करार दिया। वेंस ने कहा कि बातचीत का नतीजा चाहे जो भी हो, अमेरिका मजबूत स्थिति में है।
जेडी वेंस ने क्या कहा?
वेंस ने मंगलवार को कई साक्षात्कारों में कहा दावा किया कि ईरान की ओर से कई बार इनकार किए जाने के बावजूद दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की परमाणु क्षमताओं को नष्ट करने के बाद अमेरिका मजबूत स्थिति में है।
उपराष्ट्रपति वेंस ने पुष्टि की कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले दौर की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी स्तर पर वार्ता सक्रिय रूप से जारी है। उन्होंने कहा, पहले से तय वार्ता होनी है, जो असल में तकनीकी बातचीत है और हमारी पिछली बातचीत पर आधारित है। कल निश्चित रूप से यह बातचीत होगी।
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'आगे बढ़ रही तकनीकी वार्ता'
वेंस ने ईरान की विरोधाभासी बातों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईरान एक तरफ शांति वार्ता से इनकार करता है। लेकिन दूसरी तरफ तकनीकी बातचीत को स्वीकार करता है। उन्होंने कहा, वे कहते हैं कि शांति वार्ता नहीं हो रही। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत हो रही है।
वेंस ने कहा, वे कहेंगे, नहीं-नहीं शांति वार्ता नहीं चल रही है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर तकनीकी वार्ता हो रही है। यह बातचीत करने की फारसी चाल और अंदाज है, जिसे मैं समझ नहीं पाता।
फॉक्स न्यूज को दिए एक अलग इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरान का मूल्यांकन उसके सार्वजनिक बयानों के बजाय जमीन पर की गई ठोस कार्रवाइयों के आधार पर कर रहा है।
वेंस ने कहा, ईरानी क्या कहते हैं, इसकी हमें बहुत कम परवाह है। वे क्या करते हैं, इस पर हम ज्यादा द्यान देते हैं। भले ही वाशिंगटन को तेहरान से उत्साहजनक और चिंताजनक दोनों तरह के संकेत मिले हैं। लेकिन कोई भी पक्का समझौता तभी होगा, जब ईरान वास्तव कुछ बड़े समझौते करे।
'कूटनीतिक समाधान न निकला तो अन्य विकल्प मौजूद'
वेंस ने कहा, राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने हमें जो बताया है, वह यह है कि समस्या पर काम करें, देखें कि बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। अगर कूटनीतिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो भी हमारे पास कई विकल्प मौजूद हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने कतर की राजधानी में बैठक का अनुरोध किया है। इसके बाद अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जरेड कुशनर के दोहा जाने से कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, बाद में ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार कर दिया। ईरान ने कहा कि कतर की मध्यस्था में दोहा में होने वाली वार्ता पूरी तरह से समझौता ज्ञापन (एमओयू) की कुछ खास शर्तों पर केंद्रित होगी, जिसमें ईरान की जब्त की गई वित्तीय संपत्तियों को जारी करना भी शामिल है।