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Japanese scientists headed to China: अपना देश छोड़कर चीन क्यों जा रहे हैं जापान के रिसर्चर?

Tue, 13 Jun 2023 06:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो

सार

जापान में विश्वविद्यालयों ने अपने बजट में भारी कटौती की है। इसलिए विद्वानों के लिए यहां नौकरी मिलना कठिन हो गया है। दूसरी तरफ चीन ने पिछले 20 वर्षदों के दौरान अनुसंधान पर अपने बजट में भारी बढ़ोतरी की है...
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Japanese scientists headed to China - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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जापान के ऐसे स्कॉलर्स और शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है, जो चीन के विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं में नौकरी ज्वाइन कर रहे हैं। इसे यहां एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले सिर्फ जापान के इंजीनियरों की ही चीन में मांग थी। लेकिन अब खगोलशसास्त्र से लेकर विज्ञान की तमाम मौलिक विधाओं से जुड़े विदेशी शिक्षाशास्त्रियों का ची में स्वागत किया जा रहा है।

वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक जापान में विश्वविद्यालयों ने अपने बजट में भारी कटौती की है। इसलिए विद्वानों के लिए यहां नौकरी मिलना कठिन हो गया है। दूसरी तरफ चीन ने पिछले 20 वर्षदों के दौरान अनुसंधान पर अपने बजट में भारी बढ़ोतरी की है। इसी का नतीजा है कि अनुसंधान पत्रों की संख्या और गुणवत्ता के मामले में वह तेजी से अमेरिका के बराबर पहुंच रहा है।

जापान की तोहोकू युनिवर्सिटी में एसिस्टैंट प्रोफेसर रह चुके हिरोमू कमेओका ने पिछले सितंबर में चीन के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन मॉलिकुलर प्लांट साइसेंज ऑफ द चाइनीज एकेडमी में नौकरी ज्वाइन की। शंघाई में स्थित इस संस्थान में उन्हें अपनी टीम बनाने का अवसर दिया गया है। अपने इस कदम के बारे में कमेओका ने निक्कईएशिया से कहा- ‘मैं अपने करियर में जल्द से जल्द स्वंतत्र अनुसंधानकर्ता बनना चाहता था।’

कोमेएका मिट्टी के सूक्ष्म जीवाणुओं और पौधों के बीच संबंध पर शोध कर रहे हैं। इस शोध के लिए चीन ने उन्हें पांच साल का बजट आवंटित कर दिया है। उन्हें छह लाख 40 हजार डॉलर का बजट दिया गया है। उन्हें उन्नत किस्म के उपकरण भी दिए गए हैं, जिनको लेकर उन्होंने अपनी प्रयोगशाला स्थापित की है।

इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि चीन में जापान के कुल कितने अनुसंधानकर्ता मौजूद हैं। लेकिन इस बात की ठोस जानकारी है कि जापान से चीन जाने वाले रिसर्चर्स की संख्या बढ़ रही है। चीन में शोध को मिल रहे महत्त्व के कारण अनुसंधानकर्ताओं को वहां का माहौल अधिक आकर्षक लग रहा है।

जापान के जो रिसर्चर चीन जाकर काम करना चाहते हैं, वे अकसर इस बारे में शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मोटोयुकी हातोरी की राय लेते हैं। हातोरी ने निक्कईएशिया से कहा कि जहां तक रिसर्च के स्तर और पदों की उपलब्धता का सवाल है, तो जापान की तुलना में चीन में कहानी ‘बिल्कुल ही अलग’ है। चीन में हो रहा रिसर्च उच्चस्तरीय है और इस क्षेत्र में यहां नौकरियों की भरमार है। उन्होंने कहा- ‘चीन में पद बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं, जबकि जापान में इनकी संख्या बेहद कम है।’

बताया जाता है कि चीन में जापान के रिसर्चर सबसे ज्यादा जिन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, उनमें बायो-टेक्नोलॉजी, जीव विज्ञान, खगोलशास्त्र और पेडेस्टल फीजिक्स शामिल हैं। खगोलशास्त्र के बारे में कहा जाता है कि इसमें शोध करने वालों के लिए अवसर दुनिया भर में बहुत कम हैं। जबकि चीन में नए पद और प्रयोगशालाएं बनाई जा रही हैं। चीन सरकार ने मौलिक विज्ञान और प्रयुक्त (एप्लाइड) विज्ञान दोनों क्षेत्रों में अनुसंधान को खास महत्त्व दे रही है।

अब दुनिया के सबसे ज्यादा एकेडमिक्स (शिक्षाशास्त्री) चीन में ही हैं। साथ ही अनुसंधान बजट के मामले में चीन ने अमेरिका की लगभग बराबरी कर ली है। इस कारण भी जापान के स्कॉलर और शोधकर्ता चीन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

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