जापान के शासक नारूहितो को शासक बनने के अंतिम अनुष्ठान को पूरा करने के लिए पूरी रात लकड़ी से बने अंधेरे कमरे में बितानी होगी। इसके लिए गुरुवार को उन्हें यहां अकेले छोड़ दिया गया है। जापान में मान्यता है कि इस अनुष्ठान के दौरान खुद देवी उनसे मुलाकात के लिए वहां आएगी।
'डाईजोसाई' नाम का यह अनुष्ठान अमातेरासु ओमिकामी में होगा। यह अनुष्ठान राजा बनने के लंबे अनुष्ठान का आखिरी चरण है। माना जाता है कि जापानी शासक सूर्य रूपी देवी के वशंज हैं। अपने पिता एकिहितो के पद त्यागने के बाद नारूहितो को शासक बनाया गया था।
हालांकि कम्युनिस्ट और ईसाई समुदाय की ओर इस अनुष्ठान प्रक्रिया की आलोचना की जा रही है। इस पूरे अनुष्ठान पर 25 मिलियन डॉलर की भारी भरकम राशि के खर्च की वजह से वे इसे संविधान का उल्लंघन मान रहे हैं। विश्व युद्ध् से पहले की दो स्कूली किताबों में जिक्र है कि देवी और शासक के बीच वैवाहिक संबंध रहे हैं। इस युग में शासक को भी देवता के रूप में माना जाता था। मगर नारूहितो के दादा हीरोहितो के नाम पर लड़ी गई जंग में हार के बाद उनसे दिव्यता छीन ली गई थी।
नए राजा के साथ दावत
हालांकि विशेषज्ञों और सरकार का मानना है कि इस अनुष्ठान में नया शासक देवी के साथ खाना साझा करते हैं। यह अनुष्ठान मूल रूप से सूर्य देवी और शासक के बीच दावत है। इस दावत में हिस्सा लेने के बाद शासक में काफी बदलाव आ जाते हैं।
सफेद कपड़ों में भीतर गए सम्राट
जापान के स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे सम्राट ने पूरी तरह से सफेद कपड़े पहनकर मशाल की रोशनी में खासतौर से बने मठ में प्रवेश किया और सफेद परदों के पीछे वह गायब हो गए। ओक की पत्तियों से बनीं 32 प्लेटों में देवी के लिए व्यंजन परोसे जाएंगे और जापान की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। सम्राट यहां से अगले दिन सुबह 3 बजे बाहर निकलेंगे।
1000 साल पुरानी परंपरा
'डाईजोसाई' की परंपरा एक हजार से भी ज्यादा साल पुरानी है। कई समूह अब इस अनुष्ठान को बंद कराने की मुहिम छेड़े हुए हैं।