किसी को गले लगाना या छूना क्या कमाल कर सकता है, इसकी बानगी हमें मुन्नाभाई ने अपनी जादू की झप्पी से दिखा ही दिया था। अब जापान के एक शहर ने इस झप्पी के जादू को पहचाना है। इसके जरिए काकेग्वा शहर परिवारों को एक-दूसरे के ज्यादा करीब ला रहा है।
लगातार कम हो रही जन्म दर जापान के लिए बड़ी चिंता का विषय है। हालात ऐसे हैं कि यहां लोग एक-दूसरे को छूने से भी कतराने लगे हैं और इस वजह से स्पर्श के अहसास को वे लगातार भूलते जा रहे हैं। यहां तक कि मां अपने बच्चों तक को गले नहीं लगा रही हैं। अब यहां सरकार बच्चों को आकर्षक बनाने और उन्हें स्पर्श के सुखद अहसास और उसके प्रभाव से अवगत कराने में लगी हुई है।
टोक्यो के पास काकेगावा शहर के अधिकारियों का कहना है, 'अपने बच्चों को गले लगाओ, उनके साथ अधित समय तक खेल खेलो।' शिज़ुओका प्रान्त में स्थित यह शहर माता-पिता को एक ऐसी संस्कृति में अधिक शारीरिक संपर्क बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जहां लोग एक-दूसरे को छूने से कतराते हैं।
स्थानीय चाइल्डकेयर विभाग युवाओं को शारीरिक संपर्क के सकारात्मक प्रभावों को समझाने के लिए छपा हुआ पर्चा भी भेज रहा है। एक मां ने कहा, 'इसे पढ़ने के बाद मैं स्पर्श के महत्व के बारे में अधिक जागरुक हो गई हूं। न केवल अपने बच्चे को संभालने बल्कि अधिक शारीरिक संपर्क बनाने के लिए भी जागरुक हुई हूं।'
अधिकारियों का कहना है कि कई माता-पिता को अपने बच्चों के साथ जुड़ने में कठिनाई हो रही है क्योंकि परिवार व्यस्त हो गए हैं और वह अपने समुदाय से भी अलग होते जा रहे हैं। काकेगावा के चिल्ड्रन ब्रिलियंट डिवीजन के प्रमुख ने कहा कि नगरपालिका सरकार इस बात से अवगत है कि कई माता-पिता को बच्चे बढ़ाने में मदद की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि शारीरिक संपर्क को बढ़ावा देना उनको समर्थन करने का एक तरीका है। अध्ययन के रूप में एक महिला से घर पर अपने बेटे और बेटी के साथ अधिक समय बिताने के बारे में पूछा गया। महिला ने कहा कि एक कामकाजी माता-पिता के रूप में समय निकालना कठिन हो सकता है, लेकिन वह घर पर अपने रोजमर्रा के काम करते समय अवसरों की तलाश करती हैं।