जापान ने बुधवार को कहा कि एक चीनी हैकर समूह 'मिरर फेस' ने पिछले पांच वर्षों में 200 से अधिक साइबर हमले किए। इन हमलों में जापान की राष्ट्र सुरक्षा और उच्च तकनीकी वाले डाटा को निशाना बनाया गया। जापान की राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी (एनपीए) ने इन हमलों की रणनीतियों की जानकारी साझा की और सरकार और कारोबारियों से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का आग्रह किया।
एनपीए के मुताबिक, 2019 से 2024 तक 'मिरर फेस' की ओर से किए गए साइबर हमलों की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि यह हमले योजनाबद्ध तरीके से किए गए और इनका मकसद जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा और उन्नत तकनीक से जुड़ा डाटा चुराना था। इन हमलों में जापान के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, अंतरिक्ष एजेंसी और कुछ निजी कंपनियों, पत्रकारों, राजनेताओं और तकनीकी थिंक टैंक को निशाना बनाया गया। ये हमले चीन की सरकार के समर्थन से किए गए।
विशेषज्ञों ने कई बार कहा है कि जापान अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है और अमेरिका व अन्य देशों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। जापान ने इस दिशा में कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन और सुधार की जरूरत है।
एनपीए ने कहा, मिरर फेस ने 2019 से 2023 के बीच विभिन्न लक्षित संगठनों और व्यक्तियों को ई-मेल भेजे, जिनमें मैलवेयर (दोषपूर्ण सॉफ्टवेयर) होते थे। ये ई-मेल जीमेल और माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक के पते से भेजे गए गए थे, जो किसी की पहचान का इस्तेमाल करते थे। इन ई-मेल में आमतौर पर जापान-अमेरिका गठबंधन, ताइवान जलडमरूमध्य, रूस-यूक्रेन युद्ध और स्वतंत्र व खुला हिंद-प्रशांत जैसे विषय होते थे और एक स्टडी पैनल, संदर्भ और पैनलिस्ट की सूची शामिल होती थी।
इसके अलावा, हैकर्स ने फवरी से अक्तूबर 2023 के बीच जापान के एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष एजेंसी, सूचना और संचार क्षेत्रों को निशाना बनाकर वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाया। एयरोस्पेस एंड एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) ने माना था कि उसने 2023 में कई साइबर हमलों का सामना किया। हालांकि, रॉकेट, उपग्रह और रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पर कोई असर नहीं पड़ा।