जापान में लंबी उम्र जीने वालों की संख्या ने नया आंकड़ा दर्ज किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में एक लाख से अधिक लोग अब 100 वर्ष या उससे ज्यादा आयु के हैं। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों की तुलना में काफी अधिक है। बीते वर्षों में शतायु आबादी लगातार बढ़ी है और इसकी वजह बेहतर भोजन, चिकित्सा सुविधाओं तथा नियमित स्वास्थ्य देखभाल को माना जाता है।
जापान में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या पहली बार एक लाख के पार पहुंच गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब 1,07,677 शतायु हैं। इनमें 94,298 महिलाएं यानी 87.6% और 13,379 पुरुष हैं। पिछले साल के मुकाबले इनकी संख्या 7,914 बढ़ी है। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
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जापान में 100 साल पार लोगों की संख्या बढ़ने के पीछे स्वस्थ खान-पान, बेहतर पोषण और जीवन परिस्थितियों में सुधार, सक्रिय रहना, नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं को प्रमुख वजह माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं के अधिक समय तक जीवित रहने की एक वजह इस पीढ़ी के पुरुषों में धूम्रपान और शराब का अधिक चलन भी रहा। पुरुषों का ज्यादा शारीरिक मेहनत वाले कामों में रहना भी एक कारण माना जाता है। उम्र बढ़ने के बाद महिलाओं का परिवार और समुदाय से जुड़े रहना भी उनके लिए फायदेमंद रहा।
उपलब्धि के साथ बड़ी चुनौती भी
शतायु लोगों की बढ़ती संख्या जापान के लिए उपलब्धि के साथ चुनौती भी है। देश पहले से ही घटती आबादी और बढ़ते बुजुर्ग वर्ग से जूझ रहा है। 2020 से 2025 के बीच जापान की आबादी करीब 31 लाख कम हुई और अब देश की कुल आबादी करीब 12.23 करोड़ है। जन्मदर कम होने से युवा और कामकाजी आबादी घट रही है। इससे पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में इसका असर ज्यादा है। इस समय जापान की कुल आबादी करीब 12.26 करोड़ है।
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सबसे बुजुर्ग महिला 114 और पुरुष 112 साल के
जापान की सबसे बुजुर्ग जीवित महिला फुयो किशिमोटो हैं, जो क्योटो की रहने वाली हैं। उनकी उम्र 114 वर्ष है। सबसे बुजुर्ग पुरुष हिकारू काटो हैं, जो कुमामोटो के रहने वाले हैं और 112 वर्ष के हैं। निगाता के ओसोनोगो गांव के 107 वर्षीय तेत्सुओ सातो भी शतायु लोगों में शामिल हैं। सुनने और देखने में परेशानी के बावजूद वह खुद को व्यस्त रखते हैं।
1963 में सिर्फ 153 थे
जापान में शतायु लोगों की संख्या 1963 में सिर्फ 153 थी। 1981 में यह एक हजार, 1998 में 10 हजार और 2012 में 50 हजार के पार पहुंच गई। 2025 में यह 99,763 थी, जो अब एक लाख पार हो गई है।