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जापान बनाएगा एआई उपग्रह: अंतरिक्ष में ही खुफिया आंकड़ों का विश्लेषण, मिसाइल हमले पर फैसला होगा तेज; कैसे?

Mon, 07 Sep 2026 06:26 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, टोक्यो।

सार

जापान ऐसे उपग्रह बनाने की तैयारी कर रहा है, जो अंतरिक्ष में ही एआई से निगरानी का डाटा समझ सकेंगे। ये चलते हुए दुश्मन के ठिकानों और नौसैनिक पोतों की स्थिति का अनुमान भी लगा सकेंगे। क्या इससे जापान की जवाबी कार्रवाई पहले से ज्यादा तेज हो जाएगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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जापान एआई उपग्रह (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/जापानी अंतरिक्ष एजेंसी
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विस्तार
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जापान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लैस उपग्रह विकसित करने जा रहा है और यह कदम चीन-अमेरिका जैसे देशों के बीच अंतरिक्ष में युद्ध तकनीक की होड़ को और तेज करेगा। जापान के ये उपग्रह दूसरे निगरानी उपग्रहों से मिले आंकड़ों का अंतरिक्ष में ही एआई की मदद से विश्लेषण करेंगे और दुश्मन के ठिकानों की पहचान करेंगे।
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प्रणाली चलते हुए लक्ष्यों, जैसे जापान के दूरदराज के द्वीपों की ओर बढ़ रहे नौसैनिक पोत, की कुछ मिनट बाद की संभावित स्थिति का भी अनुमान लगा सकेगी। दुश्मन के संभावित हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई के लिए फैसला लेने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से जापान में इस दिशा में कदम बढ़ाया है।

निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक जापान का रक्षा मंत्रालय वित्त वर्ष 2027 से 2029 के बीच जापानी कंपनियों के साथ मिलकर ऐसे परीक्षण उपग्रह विकसित करने की योजना बना रहा है। पहले इनकी क्षमता का जमीन पर परीक्षण होगा। इसके बाद वित्त वर्ष 2030 या उसके बाद इन्हें अंतरिक्ष में भेजकर तकनीक की वास्तविक क्षमता परखी जाएगी। एआई प्रणाली को घरेलू स्तर पर विकसित किए जाने की उम्मीद है।
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सटीक टारगेट और टाइमिंग की जानकारी तुरंत मिलेगी
अभी जापान अंतरिक्ष से खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उपग्रहों का उपयोग करता है, लेकिन इमेजरी और डेटा का विश्लेषण जमीन जमीनी स्टेशनों पर किया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर डेटा ट्रांसफर करने में काफी समय बर्बाद होता है। नए एआई-संचालित उपग्रह अंतरिक्ष में ही निगरानी डेटा और छवियों का विश्लेषण करेंगे। इससे ग्राउंड कमांडर्स को तुरंत सटीक टारगेट और टाइमिंग की जानकारी मिलेगी, जिससे जवाबी कार्रवाई भी तुरंत होगी।
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सामरिक दृष्टि से अब तक उपग्रह केवल तस्वीरें और कच्चा डेटा धरती पर भेजते थे, जिसका विश्लेषण करने में काफी समय बर्बाद होता था। भविष्य में एआई उपग्रह केवल जरूरी हाइलाइट्स और टारगेट लोकेशन ही ग्राउंड स्टेशन को भेजेंगे, जिससे हमलों व रणनीति को लेकर तुरंत फैसला हो सकेगा।
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