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UN: भारत की पाकिस्तान को दो टूक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग थे, हैं और रहेंगे

Thu, 27 Apr 2023 06:07 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर प्रतीक माथुर ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग थे, हैं और रहेंगे।  
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Pratik Mathur - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत ने यूएन में पाकिस्तानी दूत द्वारा कश्मीर मामला उठाने के बाद अपने पड़ोसी देश को फटकारा और कहा कि कोई भी दुष्प्रचार इस तथ्य को नहीं बदल सकता कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, देश का अभिन्न हिस्सा हैं और रहेंगे। यूएन में पाकिस्तानी स्थायी मिशन के यूएनजीए (महासभा) में यह मामला उठाने के बाद भारतीय स्थायी मिशन के सलाहकार प्रतीक माथुर ने कहा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। किसी भी देश की गलत सूचना या दुष्प्रचार इस तथ्य को नहीं बदल सकते। 

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केवल पांच देशों को वीटो पावर समानता की धारणा के खिलाफ
भारतीय राजनयिक माथुर ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में वीटो पावर का इस्तेमाल नैतिक दायित्वों के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक विचार और स्वार्थ के आधार पर किया जाता है। भारत ने यह भी कहा कि वीटो शक्ति इस्तेमाल करने का अधिकार सिर्फ 5 स्थायी सदस्यों को दिया जाना अन्य देशों की संप्रभु समानता की अवधारणा के विपरीत है।

प्रतीक माथुर ने 193 सदस्यीय महासभा द्वारा ‘वीटो पहल’ को पारित किए जाने के एक साल बाद ‘वीटो के इस्तेमाल’ पर आयोजित महासभा की बैठक में कहा कि पिछले 75 साल से अधिक समय में सभी पांच स्थायी सदस्यों ने अपने-अपने राजनीतिक हित साधने के लिए वीटो का इस्तेमाल किया है। 15 देशों वाली सुरक्षा परिषद के सिर्फ पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं और उन्हीं के पास वीटो इस्तेमाल करने का अधिकार है। शेष 10 सदस्य दो साल के लिए अस्थायी रूप से चुने जाते हैं और उनके पास वीटो का अधिकार नहीं है।
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माथुर ने कहा, वीटो का इस्तेमाल नैतिक दायित्वों से नहीं, बल्कि राजनीतिक विचारों से प्रेरित होता है। जब तक यह अस्तित्व में है, वीटो का अधिकार रखने वाले सदस्य देश ऐसा करते रहेंगे, भले ही कितना भी नैतिक दबाव क्यों न हो। 

द्वितीय विश्व युद्ध की मानसिकता उजागर
जब ‘वीटो पहल’ संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था, उस समय भारत ने प्रस्ताव को पेश करने में समावेशिता की कमी पर ‘खेद’ जताया था। प्रतीक माथुर ने कहा, वीटो विशेषाधिकार सिर्फ 5 सदस्यों को देना अन्य देशों की संप्रभु समानता की अवधारणा के विपरीत है और द्वितीय विश्व युद्ध की मानसिकता उजागर करता है।

नए सदस्यों को शामिल कर वीटो अधिकार दें
माथुर ने यूएनएससी सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ताओं में अफ्रीका के रुख को उद्धृत करते हुए कहा, सैद्धांतिक रूप से वीटो को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। अन्यथा, आम न्याय की खातिर जब तक यह बना रहता है, तब तक इसमें नए स्थायी सदस्यों को शामिल करके उन्हें भी यह अधिकार दिया जाना चाहिए।

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