फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरिक्ष में धरती से 30% बड़े सुपर-अर्थ की खोज, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने पहली बार किया ग्रह की सतह का अध्ययन

Thu, 07 May 2026 06:45 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन।

सार

सुपर-अर्थ ऐसे ग्रहों को कहा जाता है जो आकार में पृथ्वी से बड़े होते हैं, लेकिन गैसीय दानव ग्रहों जितने विशाल नहीं होते। यह ग्रह अपने तारे के बेहद करीब परिक्रमा करता है और केवल 11 घंटे में उसका एक चक्कर पूरा कर लेता है।
विज्ञापन
सुपर अर्थ - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अंतरिक्ष विज्ञान में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह का विस्तृत अध्ययन किया है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से किए गए इस शोध में एलएचएस 3844 बी नाम के एक सुपर-अर्थ के ऐसे संकेत मिले हैं, जो उसे हमारे सौरमंडल के बुध ग्रह जैसा बनाते हैं। यह ग्रह अत्यधिक गर्म, अंधकारमय और पूरी तरह निर्जीव माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी सतह पर न तो कोई वातावरण है और न ही जीवन के अनुकूल परिस्थितियां। यह अध्ययन नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
विज्ञापन


यह पहली बार है जब किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह और उसकी भूगर्भीय संरचना का इतने विस्तार से अध्ययन किया गया है। यह खोज संकेत देती है कि भविष्य में दूसरे ग्रहों की जमीन व उनके भूगर्भीय इतिहास को भी समझना संभव होगा। एलएचएस 3844 बी पृथ्वी से 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर है और आकार में पृथ्वी से करीब 30 प्रतिशत बड़ा है। इसे सुपर-अर्थ श्रेणी में रखा जाता है।

क्या होते हैं सुपर-अर्थ ग्रह?
सुपर-अर्थ ऐसे ग्रहों को कहा जाता है जो आकार में पृथ्वी से बड़े होते हैं, लेकिन गैसीय दानव ग्रहों जितने विशाल नहीं होते। यह ग्रह अपने तारे के बेहद करीब परिक्रमा करता है और केवल 11 घंटे में उसका एक चक्कर पूरा कर लेता है।
विज्ञापन


ग्रह पर नहीं मिला वातावरण का कोई संकेत
शोध में सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह निकला कि एलएचएस 3844 बी पर  पृथ्वी जैसी गैसीय परत नहीं है, जो तापमान नियंत्रित कर सके या सतह को बाहरी विकिरण से बचा सके। वातावरण के अभाव में यह ग्रह सीधे अंतरिक्षीय विकिरण और उल्कापिंडों के प्रभाव का सामना करता है।  

बेसाल्ट चट्टानों की हो सकती है सतह
शोधकर्ताओं के अनुसार एलएचएस 3844 बी की सतह पृथ्वी जैसी नहीं है। ऐसे प्रमाण मिले हैं कि इसकी सतह बेसाल्ट चट्टानों से बनी हो सकती है। बेसाल्ट वह चट्टान होती है जो ज्वालामुखीय लावा के ठंडा होने से बनती है।

एमआईआरआई उपकरण महत्वपूर्ण
अध्ययन में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप पर लगे एमआईआरआई यानी मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट ने अहम भूमिका निभाई। यह उपकरण इन्फ्रारेड रोशनी का विश्लेषण कर दूरस्थ ग्रहों की सतह व तापीय गुणों का अध्ययन करता है। वैज्ञानिक इस ग्रह की सीधी तस्वीर नहीं ले सके, इसलिए उन्होंने ग्रह और उसके तारे से आने वाली रोशनी में सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण किया। 5 से 12 माइक्रोमीटर तरंगदैर्ध्य वाली इन्फ्रारेड रोशनी के अध्ययन से एक विस्तृत स्पेक्ट्रम तैयार किया गया, जिससे सतह की प्रकृति का पता चला।
विज्ञापन


अन्य वीडियो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें