विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को क्वाड के लिए 'चुनने की स्वतंत्रता', मजबूत सप्लाई चेन और गैर-बाजार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई को मुख्य प्राथमिकता बताया। इसके साथ ही, उन्होंने इस समूह के एजेंडे के लिए एक अधिक समकालीन और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की।
अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में जयशंकर ने उन प्रमुख मुद्दों का जिक्र किया, जिन पर उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ चर्चा की थी।
जयशंकर ने क्या कहा?
समूह की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना, समृद्धि को बढ़ावा देना और पसंद की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना हमारी निरंतर प्रतिबद्धताएं हैं।' उन्होंने टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा क्षेत्रों में मजबूत सप्लाई चेन बनाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
गैर-बाजार प्रथाओं का भी किया जिक्र
जयशंकर ने चर्चा के दौरान उठाई गई प्राथमिकताओं में इंडो-पैसिफिक में गैर-बाजार प्रथाओं का मुकाबला करने और बढ़ते आर्थिक दबावों को भी शामिल किया। हालांकि, उनकी पोस्ट में किसी देश का नाम नहीं लिया गया और न ही यह बताया गया कि किन विशिष्ट प्रथाओं की बात हो रही है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, उन्होंने आतंकवाद-रोधी, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण से जुड़े मौजूदा समझौतों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि मजबूती बढ़ाई जा सके और शांति व स्थिरता को समर्थन मिले।
एआई को लेकर क्या चर्चा हुई?
मंत्रियों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की इच्छा जताई। इसमें 'क्वाड एआई एक्सेलेरेटर' के माध्यम से दी जाने वाली मदद भी शामिल है। विज्ञप्ति में सुपर इंटेलिजेंस का भी जिक्र किया गया है, जिसके साथ एक फुटनोट में स्पष्ट किया गया है कि यह शब्द भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित है।
मंत्रियों ने भारत और आसियान देशों में कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने की सुविधाओं के लिए वाशिंगटन द्वारा 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने के वादे का स्वागत किया। यह राशि केवल भारत के लिए नहीं है।
ये चारों साझेदार देश, इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ से खनिज निकालने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम की जा सके। वे रीसाइकल होने वाली सामग्रियों को एक देश से दूसरे देश भेजने की प्रक्रिया को और सरल बनाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे। समुद्री सहयोग के तहत, चारों देशों के प्रतिनिधियों ने 25 सितंबर से 7 अक्तूबर के बीच चेन्नई से पर्थ तक भारतीय तटरक्षक बल के एक गश्ती जहाज पर यात्रा की।
क्या है क्वाड?
क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इनका सहयोग समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, महत्वपूर्ण व उभरती प्रौद्योगिकियों, तथा मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।
इसके साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत ने जी20 को बताया कि ऊर्जा आपूर्ति का राजनीतिकरण बहुत हानिकारक है। ऊर्जा की कमी का सबसे बुरा असर ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) पर पड़ रहा है। उन्होंने जी20 समूह से इस समस्या को समझने और स्वीकार करने का आग्रह किया। शनिवार को अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बैठक को बहुत ही सार्थक, बहुत खुली और काफी जीवंत जी20 बैठक बताया।