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Afghanistan-India: लोकसभा में अफगानी राजनियकों के भारत छोड़ने का सवाल, जयशंकर ने लिखित में दिया यह जवाब

Fri, 15 Dec 2023 11:56 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजदूत फरीद मामुंडजे ने पिछले माह ही ऐलान किया था कि भारत सरकार से सहयोग न मिल पाने के कारण उन्हें दूतावास बंद करना पड़ा रहा है। बाद में पता चला कि फरीद की टिप्पणी का असल कारण आतंरिक सत्ता संघर्ष और 20 राजनयिकों के अन्य देशों में निवास प्राप्त करने को लेकर था।
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संसद में विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर - फोटो : ANI
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विस्तार
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अफगानिस्तान के राजनयिकों के भारत छोड़ने का मुद्दे लोकसभा में भी गूंज उठा। विदेश मंत्री ने सदन में इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि तीसरे देश से निवास हो जाने के बाद कुछ राजनयिकों ने भारत छोड़ दिया है। लेकिन शेष राजनयिक मिशनों के कामकाज संभाल रहे हैं। बता दें, पिछले महीने ही अफगानिस्तान मिशनों के राजनयिकों ने भारत छोड़ा था, जिसकी वजह उन्होंने भारत सरकार से सहयोग न मिलना बताया।

तीनों मिशनों में काम जारी है

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न का लिखित उत्तर दिया। लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं। हमारे लोगों में मित्रता है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान के नई दिल्ली में दूतावास तो वहीं मुंबई और हैदराबाद में वाणिज्य दूतावास है। तीनों मिशनों में काम जारी है। पिछले दो वर्षों में कुछ अफगान राजनयिकों ने अन्य देशों में निवास प्राप्त करने के लिए भारत छोड़ दिया है। हालांकि, शेष राजनयिक देश में मिशनों का कामकाज देख रहे हैं। 

भारत सरकार को दूतावास ने बताई थी वजह
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने अब तक तालिबान की स्थापना को मान्यता नहीं दी है। काबुल समावेशी सरकार के गठन की वकालत कर रहा है। हमारा जोर है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। नई दिल्ली में काबुल के राजदूत फरीद मामुंडजे ने पिछले माह ही ऐलान किया था कि भारत सरकार से सहयोग न मिल पाने के कारण उन्हें दूतावास बंद करना पड़ा रहा है। बाद में पता चला कि फरीद की टिप्पणी का असल कारण आतंरिक सत्ता संघर्ष और 20 राजनयिकों के अन्य देशों में निवास प्राप्त करने को लेकर था। फरीद जून से लंदन में हैं।

जानें दूतावास ने क्या कहा था

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बता दें कि नई दिल्ली में अफगानिस्तान दूतावास का परिचालन बीती 30 सितंबर से बंद है। अफगानिस्तान सरकार ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें भारत सरकार से सहयोग नहीं मिल सका, जिसके बाद आठ हफ्ते इंतजार करने के बाद नई दिल्ली स्थित अफगानिस्तान का दूतावास बंद करने का फैसला किया है। अफगानिस्तान ने कहा है कि विएना कन्वेंशन 1961 के मुताबिक भारत सरकार से मांग की गई है कि अफगानिस्तान के दूतावास की संपत्ति, बैंक अकाउंट, वाहनों और अन्य संपत्तियों की कस्टडी उन्हें दी जाए। अफगानिस्तान ने मिशन के बैंक खातों में रखे करीब पांच लाख डॉलर की रकम पर भी दावा किया है।   

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