इटली के ताजा चुनाव नतीजे से यूरोप के लिबरल खेमे में भारी बेचैनी है। इटली में पोस्ट-फासिस्ट नेता जियोर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाले धुर दक्षिणपंथी गठबंधन की जीत को पूरे यूरोप में उभर रहे सियासी ट्रेंड का हिस्सा माना गया है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के नेतृत्व में बनने जा रही सरकार इटली में बेनितो मुसोलिनी के फासीवादी दौर के बाद की सबसे अधिक धुर दक्षिणपंथी सरकार होगी। सीएनएन ने कहा है कि मुसोलिनी का नाम आने भर से दूसरे विश्व युद्ध की भयानक यादें ताजा हो गई हैँ। 45 वर्षीया मेलोनी अतीत में मुसोलिनी की खुल कर तारीफ कर चुकी हैं।
इटली के चुनाव के हफ्ते भर पहले स्वीडन का चुनाव नतीजा आया। वहां भी धुर दक्षिणपंथी डेमोक्रेटिक पार्टी सबसे आगे रही। इस पार्टी की ‘नव-नाजीवादी’ जड़ों की भी खूब चर्चा रही है। अब स्वीडन में बनने वाली नई सरकार पर आव्रजक विरोधी इस पार्टी का काफी प्रभाव रहेगा। मेलोनी और उनके गठबंधन में शामिल लीग पार्टी का भी एक प्रमुख एजेंडा आव्रजन विरोध है।
राजनीतिक जोखिम के बारे में अध्ययन करने वाली संस्था वाइकिंग स्ट्रेटेजीज के अध्यक्ष ट्रिग्वे ओलसन ने कहा है- ‘यह घटनाक्रम परेशान करने वाला है। इसका संकेत यह है कि यूरोप में बड़ी संख्या में मतदाता अपनी चिंताओं को लेकर बेसब्र हो गए हैं। परंपरागत राजनीतिक पार्टियां उनकी समस्या का समाधान करेंगे, उनकी यह आशा टूट गई है।’
अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों की प्रोफेसर राफेला डेन्सीगियर ने सीएनएन से कहा- अमेरिकावासियों को धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों की सफलता अचानक आए बदलाव के रूप में नजर आ सकती है। लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। गुजरे वर्षों के दौरान धुर दक्षिणपंथी मुद्दों ने आम लोगों में अपनी काफी पैठ बना ली है। इसलिए यह जारी ट्रेंड का आगे बढ़ना भर है।
ऐसे पर्याप्त उदाहरण हैं, जिनसे यह साफ होता है कि यूरोप में हाल के वर्षों में धुर दक्षिणपंथी नेताओं का आधार मजबूत हुआ है। फ्रांस में मेरी ली पेन इस वर्ष राष्ट्रपति चुनाव में हार गईं, लेकिन उन्हें 41 फीसदी से अधिक वोट मिले। 2017 के चुनाव में उनके वोट में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2017 में जर्मनी में पहली बार आव्रजक विरोधी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी को संसद में सीटें हासिल हुई थीं। तब से उस पर सरकार नजर रख रही है। इसके बावजूद उसका जनाधार बना हुआ है।
सीएनएन के विश्लेषक ल्युक मैक्गी ने ध्यान दिलाया है कि मेलोनी समलैंगिक और ट्रांसजेंडर अधिकारों और गर्भपात के अधिकार पर लगातार सवाल उठाती रही हैं। वे परंपरागत पारिवारिक मूल्यों की वकालत करती हैं। ये तमाम बातें वही हैं, जो दुनिया भर के धुर दक्षिणपंथी नेताओं का एजेंडा हैं। मैक्गी ने धुर दक्षिणपंथी नेताओं के कुछ लक्षणों का जिक्र किया है। इसके मुताबिक उदार लोकतंत्र का विरोध करते हैं और तानाशाही ढंग की व्यवस्था की वकालत करते हैं। वे ईसाई राष्ट्रवाद की बात करते हैं और जीवन में परिवार के महत्त्व पर जोर देते हैं। साथ ही वे खुल कर ‘एलजीबीटीक्यू (समलैंगिक-ट्रांसजेंडर) लॉबी’ का विरोध करते हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ऐसे ही ही नेता हैं। इटली के चुनाव नतीजों को इस बात का संकेत माना गया है कि ऐसे नेताओं का प्रभाव फिलहाल हर लोकतांत्रिक देश में बढ़ रहा है।