रविवार को होने वाले इटली के आम चुनाव में यूरोपियन यूनियन (ईयू) का भविष्य भी दांव पर लगा है। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक जियोर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली पोस्ट-फासिस्ट विचारधारा वाली ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के गठबंधन को इस चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है। इस धुर दक्षिणपंथी गठबंधन में मेतियो साल्विनी के नेतृत्व वाली आव्रजक विरोधी पार्टी- द लीग और सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नेतृत्व वाली फोर्जा इतालिया भी शामिल हैं। जनमत सर्वेक्षणों में इस गठबंधन को 48 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।
मेलोनी उग्र राष्ट्रवादी और यूरोपीय एकता के प्रति विरोध भाव रखने वाली नेता मानी जाती हैं। प्रमुख मध्यमार्गी दल डेमोक्रेटिक पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर मेलोनी प्रधानमंत्री बनीं, तो इटली ईयू से किनारा कर लेगा। पार्टी के नेता एनरिको लेत्ता ने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा- ‘इटली यूरोप में अपनी मुख्य भूमिका खत्म कर लेगा। मेलोनी के शासनकाल में यूरोप का भविष्य कम मजबूत और कम सुरक्षित हो जाएगा। उनका नजरिया यूरोप समर्थक नहीं है। हम ईयू में जर्मनी, फ्रांस और स्पेन के साथ रहना चाहते हैं, जबकि वे इटली को हंगरी और पोलैंड की तरफ ले जाएंगी।’
यूरोप में धुर दक्षिणपंथी नेताओं के उभार पर किताब लिख चुकीं कैथराइन फियशी ने इसी अखबार से कहा कि मेलोनी के कार्यकाल में हमें इटली फर्स्ट की नीति देखने को मिलेगी। वे अपने विचारों पर अड़ी रहने वाली शख्सियत हैं और इटली में मौजूद रूढ़िवादी ईसाई सोच के साथ उन्होंने खुद को जोड़ लिया है।
पर्यवेक्षकों ने कहा है कि इटली के चुनाव नतीजों पर जितनी निगाह इटलीवासियों की टिकी है, उतनी ही दिलचस्पी से इसे ब्रसेल्स (ईयू मुख्यालय), वाशिंगटन और मास्को में भी देखा जा रहा है। मेलोनी के गठबंधन में शामिल दलों का ईयू के प्रति विरोध भाव जग-जाहिर रहा है। अभी तक इटली यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन का मजबूती से समर्थन करता रहा है। लेकिन अगली सरकार के तहत ऐसा रहेगा, इसे लेकर शक है।
नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) में इटली के राजदूत रहे चुके स्टीफानो स्टेफानिनी ने कहा है कि मेलोनी के शासनकाल में इटली यूक्रेन के प्रति नीति तय करने में ईयू के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि मेलोनी गठबंधन में शामिल साल्विनी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रशंसक रहे हैं। यूरोपीय एकता के मामले उनका रुख मेलोनी से मेल खाता है। मेलोनी ब्रसेल्स स्थित नौकरशाहों को ‘अंतरराष्ट्रीय वित्त से संचालित वैश्विक नकारवादी (निहिलिस्ट) शासक वर्ग का हिस्सा बता चुकी हैं।’
चुनाव अभियान के दौरान मेलोनी ने यूक्रेन को सैनिक मदद देने की नीति जारी रखने का वादा किया है। उन्होंने रूस पर लगे प्रतिबंधों का भी समर्थन किया है। लेकिन साल्विनी ने चुनाव प्रचार के दौरान प्रतिबंधों की आलोचना की है। कुछ रोज पहले एक चुनाव सभा में उन्होंने कहा- ‘यूरोप ने युद्ध शुरू होने के बाद प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। यह ठीक है, लेकिन प्रतिबंधों की कीमत इटली के आम परिवार और कारोबारी नहीं चुका सकते। इन प्रतिबंधों से युद्ध छेड़ने वाले लोग (पुतिन और उनका शासन) घुटने नहीं टेक रहे हैं। बल्कि कीमत हम और आप चुका रहे हैं।’